1. आर्थिक प्रणालियां

Indian economy संघ लोक सेवा आयोग
  1. वर्तमान में किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को पूर्णतः पूंजीवादी अर्थव्यवस्था अथवा पूर्णता समाजवादी अर्थव्यवस्था की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता हालांकि वर्गीकरण के उद्देश्य विभिन्न आर्थिक प्रणाली को निम्नलिखित वर्गों में विभक्त किया जा सकता है –

1.1 पूंजीवाद

  1. पूंजीवाद के अंतर्गत सभी कृषि क्षेत्रों कारखानों एवं उत्पादन के अन्य साधनों पर निजी व्यक्तियों एवं फर्मों को स्वामित्व होता है विसर्जन के दिन का उपयोग करने या यदि इन उचित लगे तो उपयोग ना करने के लिए स्वतंत्र होते हैं संपत्तियों के स्वामियों द्वारा संपत्ति के उपयोग एकमात्र लक्ष्य की प्राप्ति है इस व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति संपत्ति के निशुल्क और निर्बाध उपयोग के अतिरिक्त अपनी रूचि के अनुसार किसी भी प्रकार का उत्पादन कार्य करने के लिए स्वतंत्र होता है इसके साथ ही व्यक्ति अपने लाभ हेतु अन्य नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार के अनुबंध करने के लिए भी स्वतंत्र होता है।
  2. यद्यपि सभी प्राथमिक राज्यों द्वारा जन सामान्य के हित में आर्थिक स्वतंत्रता पर कुछ प्रतिबंध आरोपित किए गए हैं इन प्रतिबंधों के बावजूद पूंजीवादी वर्ग को अनेक लाभ प्राप्त है जिसे अपनी इच्छा अनुसार संपत्ति को प्रयोग स्वयं के लिए लाभप्रद माने जाने वाले व्यवसाय का आरंभ अपने हितों के लिए आवश्यक समझी जाने वाले अनुबंधों में शामिल होना।
  3. इस व्यवस्था में क्या कैसे और किस के लिए उत्पादन किया जाए इन सभी केंद्रीय आर्थिक समस्याओं का निर्धारण स्वतंत्रता पूर्व मांग एवं पूर्ति के बलों द्वारा किया जाता है। प्रो. लॉक्स के शब्दों में पूंजीवाद आर्थिक संगठन की एक प्रणाली है जिसमें निजी स्वामित्व एक महत्वपूर्ण विशेषता होती है तो जब प्राकृतिक एवं मानव निर्मित पूंजी का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए किया जाता है।

1.1.1 पूंजीवाद की सामान्य विशेषताएं

  1. निजी संपत्ति का अधिकार
  2. उद्यम की स्वतंत्रता इसमें तीन प्रकार की स्वतंत्रता में शामिल है : उद्यम की स्वतंत्रता, अनुबंध की स्वतंत्रता एवम स्वयं की संपत्ति के उपयोग की स्वतंत्रता
  3. उपभोक्ताओं को चयन की स्वतंत्रता
  4. लाभ लक्ष्यन्
  5. वर्ग संघर्ष
  6. आर्थिक गतिविधियों के लिए किसी सक्रिय विनियमन अथवा केंद्रीय दिशानिर्देश की आवश्यकता नहीं होती
  7. जोखिमों के साथ नियंत्रण जो व्यक्ति धन संबंधी जोखिम लेते हैं उसका व्यापार पर नियंत्रण होता है
  8. प्रतिस्पर्धा
  9. मूल्य प्रणाली का महत्व
  10. आर्थिक असमानता

1.1.2 पूंजीवाद के लाभ

  1. स्वताः संचालित
  2. उच्च दक्षता एवं बेहतर निष्पादन हेतु श्रम शक्ति को प्रोत्साहन
  3. पूंजी निर्माण की उच्च दर
  4. आर्थिक विकास एवं समृद्धि
  5. संसाधनों का इष्टतम उपयोग
  6. न्याय संगत एवं लोकतांत्रिक
  7. उद्यान एवं जोखिम उठाने के लिए प्रोत्साहन
  8. अनुकूलनशीलता

1.1.3 पूंजीवाद की हानियां या आलोचना :

  1. अनावश्यक प्रतिस्पर्धा
  2. मानव कल्याण की उपेक्षा
  3. आर्थिक अस्थिरता एवं बेरोजगारी
  4. मानवाधिकारों पर संपत्ति अधिकारों को वरीयता
  5. सामाजिक अन्याय तथा आर्थिक असमानता
  6. संसाधनों का दोषपूर्ण आवंटन
  7. एकाधिकार एवं आर्थिक शक्तियों के संकेंद्रण का प्रारंभ
  8. कदाचार

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