सिल्वरलाइन परियोजना

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सिल्वरलाइन परियोजनाकेरल सरकार द्वारा चलाई जा रही 63,940 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को सबसे बड़ी बुनियादी अवसंरचना योजनाओं में से एक के रूप में चिह्नित किया गया है। इस परियोजना के तहत 11 स्टेशनों के माध्यम से 11 राज्यों के 11 ज़िलों को कवर किया जाना है। परियोजना के पूरा होने पर कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक के सफ़र को मात्र 4 घंटों में पूरा किया जा सकेगा, जबकि वर्तमान में भारतीय रेलवे के माध्यम से इस सफर को तय करने में कुल 12 घंटे से अधिक समय लगता है। इस परियोजना को ‘केरल रेल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (KRDCL) द्वारा वर्ष 2025 तक पूरा किया जाएगा। हालाँकि कई राजनीतिक समूहों द्वारा यह तर्क देते हुए इस परियोजना का विरोध किया जा रहा है कि यह परियोजना आर्थिक रूप से पूर्णतः अलाभकारी है और इसके कारण लगभग 30000 परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा, साथ ही इस परियोजना के कारण वृक्षों के नुकसान का भी सामना करना पड़ेगा।

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