आर्थिक प्रगति

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आर्थिक प्रगति शब्द का सन्दर्भ उन मूल्यगत निर्णयों से है जिसके द्वारा यह निष्कर्ष प्राप्त किया जाता है कि ‘क्या वांछनीय है’ और ‘क्या अवांछनीय है ‘ यह आर्थिक विकास एवं आर्थिक संवृद्धि से कुछ और अधिक है। यह आर्थिक संवृद्धि /विकास के न्यायोचित वितरण के पक्ष पर ध्यान केंद्रित करता है। यह एक धनात्मक परिवर्तन का गुणात्मक पक्ष (Qualitative Aspect) है। उदाहरणार्थ, यदि मूल्यगत निर्णयों द्वारा देश में आय विषमताओं में कमी लाना हो तथा यदि समय के साथ साथ देश के आय में वृद्धि हो रही है किंतु आय का अधिकाधिक समकेंद्रण समाज के धनी व्यक्तियों के पास होता जा रहा है आज इसके परिणाम स्वरूप आय विषमता बढ़ रही है तो उसे आर्थिक प्रगति नहीं कहा जाएगा। अतः आर्थिक प्रगति एक सभ्य समाज का सर्वोच्च उद्देश्य होता है।

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