आर्थिक संवृद्धि एवम विकास

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सामान्य परिचय :

अर्थव्यवस्था की समझ विकसित करने से पहले यह समझना जरूरी है कि किसी देश की आर्थिक गतिविधियों का मूलभूत उद्देश्य क्या होना चाहिए ? साथ ही अर्थव्यवस्था का आम आदमी के जीवन से सरोकार होता है? वस्तुतः सभी आर्थिक गतिविधियों और क्रियाओं का उद्देश्य मानव जीवन को अभावयुक्त, सुविधाजनक और गुणवत्तायुक्त बनाना है, इसलिए सरकारें अपनी आर्थिक नीतियों को आम जनता के हितों के अनुसार ही बनाती है। इसके तहत सभी व्यक्तियों तक न केवल रोटी, कपड़ा और मकान जैसी आधारभूत भौतिक जरूरतों की पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाते है, बल्कि गुणवत्तापरक जीवन की दशाओं (शिक्षा, स्वास्थ, स्वच्छ पर्यावरण) को भी उपलब्ध कराया जाता है। हमारा भारतीय संविधान भी इसी उद्देश्य को लेकर चलता है और अर्थव्यवस्था की दिशा को ‘न्यायपूर्ण समाज’ की स्थापना की ओर प्रेरित करता है।

अब यहां यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर किसी अर्थव्यवस्था की स्थिति या संभावना का निर्धारण कैसे किया जा सकता है? या वे कौन से मापदंड हैं, जिसके आधार पर देश के आर्थिक स्वास्थ्य का मूल्यांकन संभव हो पाता है? इसी संदर्भ में हम अर्थव्यवस्था से संबंधित दो महत्वपूर्ण अवधारणाओं ‘आर्थिक विकास एवम आर्थिक संवृद्धि’ पर विचार करेंगे। इसी क्रम में आइए सबसे पहले हम आर्थिक विकास को समझने का प्रयास करेंगे।

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