1.2.2. सैन्य कारण

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मुगल विघटन का एक अन्य कारण मुगल सेना की क्षमता में रास और मनोबल में कमी था। मुगल साम्राज्य के विघटन के मुख्य कारणों में से एक सेना का नैतिक पतन था। इसका मुख्य स्त्रोत सेना की संरचनात्मक कमजोरियां थी। अनुशासन की कमी के कारण सेना एक भीड़ में बदल गई सैनिकों में अभ्यास का भाव था साथियन को पेशेवर प्रशिक्षण भी नहीं मिलता था। सैन्य अपराधों के लिए कोई नियमित सजा नहीं थी। औरंगजेब द्वारा विराज रो कायरता और युद्ध के समय कर्तव्य की उपेक्षा जैसे मामलों की अनदेखी की गई। इसके अतिरिक्त मुगलों की सैन्य व्यवस्था की कमजोरी के बारे में तर्क दिया जाता है कि उनके हथियार और युद्ध के तरीके काफी पुराने हो चुके थे।

1.2.3 जागीरदारी संकट :

औरंगजेब कि शासन के अंतिम काल में प्रशासनिक व्यय को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में जागीर भूमि को खालिसा भूमि में परिवर्तित किया गया। वहीं दूसरी ओर में मनसबदारी की नियुक्ति जारी रही जिससे एक विरोधाभास की स्थिति भी उत्पन्न हो गई थी। साथी उक्त काल में क्षेत्रीय प्रशासन कमजोर होने से जागीरो की जमादानी और हासिलदानी में आने वाले अंतर ने मनसबदारो की सैन्य स्थिति को कमजोर किया जो मुगल साम्राज्य की रीढ कहे जाते थे।

1.2.4 आर्थिक कारण :

शाहजहां के समय में कर की दर को उत्पादन के आधे हिस्से तक बढ़ा दिया गया था। भव्य इमारतों के निर्माण पर शाहजहां द्वारा किए गए वैसे साम्राज्य के संसाधन पर भारी बोझ पड़ा। औरंगजेब के दीर्घकालीन दक्षिण युद्ध ने न केवल कुछ ही रिक्त कर दिया अभी तो देश के व्यापार और उद्योग को भी नष्ट कर दिया। औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य को वित्तीय दिवालियापन का सामना करना पड़ा जिसकी शुरुआत औरंगजेब के समय और उसकी मृत्यु के बाद ही हो गई थी। युद्धों में सेना के आवागमन से खड़ी फसलें नष्ट हो गई। कृषकों ने तंग आकर कोशिश करना छोड़ दिया और लूटमार आरंभ कर दिया। जिसके फलस्वरूप माल मिलने में कठिनाई हुई और निर्यात प्रभावित हुआ। इस काल में टैक्स फार्मिंग की प्रणाली (निजी नागरिकों या समूह को कर राजस्व संग्रहण के जिम्मेदारी सौपना) का सहारा लिया जाता था हालांकि इस पद्धति से सरकार को ज्यादा लाभ नहीं हुआ पर इसने लोगों की स्थिति को और खराब कर दिया।

मुगल साम्राज्य के चरम उत्कर्ष काल में देसी बैंकिंग बीमा एवं व्यापारिक संस्थान साम्राज्य के महत्वपूर्ण सहयोगी थे, परंतु औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात उक्त संस्थानों ने क्षेत्रीय शक्तियों में अधिक स्थायित्व के लक्षण देकर इन्हें सहयोग देना प्रारंभ कर दिया। इससे मुगल साम्राज्य आर्थिक दिवालियापन की ओर बढ़ने लगा। कृषि क्षेत्र में नगर में निवेश तथा आश्रितों की संख्या बढ़ना भू राजस्व की दर में बढ़ोतरी समय के साथ में प्रौद्योगिकी का विकास ना होना तथा शहरी जनसंख्या का ग्रामीण क्षेत्र में प्राप्त अधिशेष पर निर्भर रहना आदि जैसे कारणों ने साम्राज्य की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया।

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