भारत में अंग्रेजों का आगमन

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  • 1588 ईसवी में स्पेनिश आरमेडा पर अंग्रेजों की जीत के बाद देश की वाणिज्यिक गतिविधियों में से जुड़े लोग और व्यापारी “ईस्ट इंडीज” के साथ प्रत्यक्ष व्यापार करने के बारे में सोचने लगे।
  • 1599 में लॉर्ड मेयर की अध्यक्षता में एक प्रस्ताव पारित किया गया था इस प्रस्ताव में भारत के साथ सीधे व्यापार करने हेतु एक “कंपनी” बनाने की योजना तैयार की गई थी इस कंपनी का नाम (गवर्नर एंड कंपनी ऑफ द मर्चेंट ऑफ़ लंदन ट्रेंडिंग इन टू द ईस्ट इंडीज) रखा गया।
  • 31 दिसंबर 1600 को इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ ने एक आज्ञा पत्र द्वारा इसे 15 वर्षों के लिए पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने का एकाधिकार प्रदान किया इसे 2 वर्ष की पूर्व नोटिस देकर समाप्त किए जाने का प्रावधान था।
  • इसे बाद में किंग जेम्स1 ने “अगर व्यापार में एकाधिकार बड़े पैमाने पर लोगों के हितों के लिए हानिकारक पाया गया” तो 5 वर्ष के नोटिस पर समाप्ति का प्रावधान को जोड़ कर दीर्घकालिक बना दिया।

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