वलसा देवरालु

राज्य लोक सेवा आयोग संघ लोक सेवा आयोग

सदियों पुराना ग्रामीण त्योहार वलसा देवरालु (Valasa Devarlu) चित्तूर ज़िले के पश्चिमी मंडलों के कई गाँवों में मनाया जा रहा है।

  • वलसा देवरालु’ आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में मनाया जाने वाला सदियों पुराना एक त्योहार है।
  • यह एक पारंपरिक अनुष्ठान (कुछ लोगों के अनुसार एक ‘त्योहार’) है जिसकी शुरुआत सम्राट श्रीकृष्ण देवरयालु या कृष्ण देवराय के शासन काल में हुई थी।
  • ग्रामीण इलाकों में सूखे की स्थिति का सामना करने के लिये यह तब मनाया जाता है जब बुआई के लिये कुछ ही हफ्ते शेष बचे हों।
  • बारिश न होने, फसलों के ख़राब हो जाने तथा महामारी फैलने के दौरान गाँव के सभी लोग सवेरा होते ही अपने-अपने घरों को छोड़ देते है और संध्याकाल तक मैदानों में ही रहते हैं।
  • गाँव के बुजुर्ग तम्बू या पेड़ के नीचे चिकनी मिट्टी से बनी देवी ‘वलसा देवारमा’ की प्रतिमा की विशेष पूजा करते हैं। सामूहिक भोजन के पश्चात् गाँव के सभी लोग अपने घरों को लौट जाते हैं। इस मौके को यादगार बनाने के लिये लोग नाचते-गाते भी हैं।
  • गाँव के सभी पुरुष पास की ब्वायकोंडा पहाड़ी पर जानवरों की बलि देने के पश्चात् प्रसिद्ध गंगामा मंदिर में पूजा करते हैं।

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