यौन उत्पीड़न से महिलाओं का संरक्षण (POSH) अधिनियम, 2013

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चर्चा में क्यों?

हाल ही में ईंधन की कीमतों में तीव्र और अचानक वृद्धि ने कज़ाखस्तान में राष्ट्रीय संकट पैदा कर दिया, जिससे देश भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए तथा सरकार को त्यागपत्र देना पड़ा।

  • सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के बीच, देश के सत्तावादी राष्ट्रपति के अनुरोध पर रूसी नेतृत्व वाली सेनाएं भी कज़ाखस्तान पहुंँच गई हैं।
  • इससे पहले भारत के रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में कज़ाखस्तान गणराज्य के रक्षा मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।

प्रमुख बिंदु

अशांति का कारण:

  • तेल समृद्ध मध्य एशियाई राष्ट्र में ईंधन की कीमतों के दोगुने होने के बाद गुस्साए कज़ाखस्तान के लोग पहली बार सड़कों पर उस समय उतरे, जब सरकार ने सामान्यत: वाहनों में इस्तेमाल होने वाली तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) के लिये प्राइस कैप (Price Caps) को हटा दिया।
  • आयल सिटी झानाओज़ेन में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ, जहांँ 2011 में खराब काम करने की स्थिति का विरोध कर रहे कम-से-कम 16 तेल श्रमिकों को पुलिस ने मार डाला था।
  • देश भर के शहरों और कस्बों में प्रदर्शन शुरू हो गए और तेजी से हिंसक हो गए, जिसे कज़ाखस्तान के इतिहास में विरोध की सबसे बड़ी लहर कहा जा रहा है।
  • सोवियत संघ के पतन के बाद से कज़ाखस्तान में काफी हद तक स्थिर निरंकुशता (Stable Autocracy) रही है, जहाँ इस पैमाने का विद्रोह 1980 के दशक के बाद से नहीं देखा गया है।
  • निरंकुशता किसी देश की सरकार की एक प्रणाली है जिसमें एक व्यक्ति के पास पूरी शक्ति होती है।
  • प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस्तीफे की मांग की है।
  • उन्होंने तर्क दिया है कि कीमतों में उछाल खाद्य कीमतों में भारी वृद्धि का कारण बनेगा और आय असमानता को बढ़ाएगा, जिसने दशकों से देश को त्रस्त किया है।
  • अभी पिछले वर्ष (2021) ही देश में मुद्रास्फीति वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 9% तक बढ़ गई थी, यह बीते पाँच वर्षों में सबसे अधिक थी।

लोकतंत्र की मांग:

  • यद्यपि देश में ईंधन काफी सस्ता है, किंतु बढ़ती आय असमानता को लेकर कज़ाखस्तान के आम लोगों के बीच असंतोष बढ़ रहा है, जो कि कोरोना वायरस महामारी तथा लोकतंत्र की कमी के कारण और भी गंभीर हो गया है।
  • जबकि देश राजनीतिक रूप से स्थिर होकर लाखों डॉलर के विदेशी निवेश को आकर्षित करने में सक्षम रहा है, मौलिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिये वर्षों से इसकी सत्तावादी सरकार की व्यापक रूप से आलोचना की गई है।

विरोध का महत्त्व:

विश्व के लिये:

  • रूस और चीन के बीच स्थित कज़ाखस्तान दुनिया का सबसे बड़ा लैंडलॉक देश है, जो पूरे पश्चिमी यूरोप से भी बड़ा है, हालाँकि इसकी आबादी सिर्फ 19 मिलियन है।
  • इसके पास विशाल खनिज संसाधन मौजूद हैं, जिसमें 3% वैश्विक तेल भंडार और महत्त्वपूर्ण कोयला और गैस क्षेत्र हैं।
  • यह यूरेनियम का शीर्ष वैश्विक उत्पादक है, जिसकी कीमतों में अस्थिरता के बाद 8% की वृद्धि हुई है।
  • देश बिटकॉइन के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा माइनर भी है।
  • बड़ी रूसी अल्पसंख्यक आबादी के साथ यह मुख्य रूप से मुस्लिम गणराज्य है, यह मध्य एशिया के अन्य हिस्सों में देखे गए नागरिक संघर्ष से अब तक काफी हद तक सुरक्षित रहा है।
  • नवीनतम प्रदर्शन इस लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण हैं कि देश को अब तक एक अस्थिर क्षेत्र में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के स्तंभ के रूप में माना जाता है, हालाँकि यहाँ यह स्थिरता एक दमनकारी सरकार की कीमत पर आई है जो असंतोष को दबाती है।

रूस के लिये:

  • विरोध इसलिये भी महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि कज़ाखस्तान को रूस के साथ जोड़ दिया गया है, जिसके राष्ट्रपति रूस के प्रभाव क्षेत्र के हिस्से के रूप में देश को अपनी आर्थिक और राजनीतिक प्रणालियों के मामले में रूस के लिये एक निकाय के रूप में देखते हैं।
  • सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन द्वारा हस्तक्षेप, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का एक रूसी संस्करण, पहली बार है कि इसके संरक्षण क्षेत्र को एक ऐसा कदम लागू किया गया है जो संभावित रूप से इस क्षेत्र में भू-राजनीति के लिये व्यापक परिणाम प्रदर्शित कर सकता है।
  • वर्ष 2014 में यूक्रेन में और वर्ष 2020 में बेलारूस में लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों के बाद एक सत्तावादी रूस- गठबंधन राष्ट्र के खिलाफ तीसरा विद्रोह है।
  • अराजकता इस क्षेत्र में रूस की क्षमता को कम करने की धमकी देती है जब रूस, यूक्रेन और बेलारूस जैसे देशों में अपनी आर्थिक और भू-राजनीतिक शक्ति का दावा करने की कोशिश कर रहा है।
  • पूर्व सोवियत संघ के देश भी विरोध प्रदर्शनों को करीब से देख रहे हैं और कज़ाखस्तान की घटनाओं से कहीं और विपक्षी ताकतों को सक्रिय करने में मदद मिल सकती है।

अमेरिका के लिये

  • कज़ाखस्तान अमेरिका के लिये भी मायने रखता है, क्योंकि यह अमेरिकी ऊर्जा चिंताओं के लिये एक महत्त्वपूर्ण देश बन गया है, एक्सॉन मोबिल और शेवरॉन ने पश्चिमी कज़ाखस्तान में अरबों डॉलर का निवेश किया है।
  • संयुक्त राज्य सरकार लंबे समय से रूस और बेलारूस की तुलना में कजाखस्तान में उत्तर सोवियत सत्तावाद की कम आलोचक रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया:

  • कज़ाखस्तान पर हमले के संदर्भ में सरकार ने प्रदर्शनकारियों को “आतंकवादियों का एक समूह” घोषित किया और रूसी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन को हस्तक्षेप करने के लिये कहा।
  • सरकार ने आपातकाल की स्थिति स्थापित करके और सोशल नेटवर्किंग साइटों तथा चैट ऐप्स को अवरुद्ध करके प्रदर्शनों को शांत करने का भी प्रयास किया है।
  • बिना परमिट के सार्वजनिक विरोध पहले से ही अवैध थे। इसने शुरू में प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगों को स्वीकार कर लिया, कैबिनेट को खारिज़ कर दिया और संसद के संभावित विघटन की घोषणा की, जिसके परिणामस्वरूप नए चुनाव होंगे। लेकिन इसके अब तक के कदम असंतोष पर काबू पाने में विफल रहे हैं।

वैश्विक प्रतिक्रिया:

  • संयुक्त राष्ट्र (यूएन), अमेरिका, ब्रिटेन और फ्राँस ने सभी पक्षों से हिंसा से दूर रहने का आह्वान किया है
  • भारत कज़ाखस्तान की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और भारतीयों की वापसी में मदद करेगा।

आगे की राह

  • अमेरिका और दुनिया के अन्य प्रमुख देशों को कज़ाखस्तान के अधिकारियों को इंटरनेट बंद न करने और हिंसा से बचने के लिये प्रेरित करने की ज़रूरत है।
  • दीर्घावधि में संयुक्त राष्ट्र को कज़ाखस्तान पर वैध रूप से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिये दबाव डालना चाहिये अन्यथा वहाँ अधिक से अधिक विरोधी गतिविधियाँ उत्पन्न होंगीं।

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