विकास ले लिए ज्ञान

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विगत 5 दशकों में एशिया के दिन अग्रणी देशों ने ज्ञानार्जन तथा ज्ञान सृजन में निवेश उन्होंने अन्य देशों के मुकाबले अधिक तेजी से प्रगति की ओर उनके अनुभवों से यह सीखना जरूरी है कि हमें ज्ञान का सृजन अर्जुन संयोजन तथा प्रसार में निवेश करना चाहिए ताकि सामाजिक स्थितियों में सुधार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाई जा सके इस तरह के उपयोग अधिगम अर्जुन संयोजन और संचार के द्वारा सामाजिक उद्देश्य प्राप्त किया जा सके।

इस प्रक्रिया मैं पहला कदम आंकड़ों तथा सूचना तक पहुंचना है एक बार लोगों को आंकड़े और सूचनाएं उपलब्ध हो जाए तो लोग उन्हें अर्जित करेंगे उनका अपने निजी अनुभवों के साथ से संयोजन कर एक अर्थ पूर्ण स्वरूप प्रदान करेंगे। आंकड़ों का संसाधन स्त्रोत की निकटता उसकी विश्वसनीयता संचार तंत्र के साथ-साथ इस आस्था पर निर्भर करता है कि कौन से सूचना मिली उपयोगी होगी सूचना कैसे नियोजन के लिए लोगों के पास कुछ विशेष कौशल होना चाहिए तो नियोजित सूचना को ज्ञान के तौर पर प्रसारित किया जाता है ताकि सामाजिक उद्देश्य हेतु योजना बनाकर उन्हें क्रियान्वित किया जा सके।

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग से उपयोगी सूचना सुदूरवर्ती गांवों में रहने वाले लोगों तक पहुंचती है इससे ना केवल उनकी जागरूकता में इजाफा होता है बल्कि उनकी अपेक्षाएं भी बढ़ती है ज्ञान कल्याण का आधार होता है भविष्य में आर्थिक विकास का मुख्य कारण उत्पादकता वृद्धि नहीं बल्कि नवाचार के अंतर्गत प्रबंधन प्रणाली ज्ञान अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनेंगे सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी के द्वारा उनकी अनेक प्रौद्योगिकियों को आपस में जोड़कर ज्ञान प्रक्षेपित अक्षर तैयार की जा सकती है।

देश की ज्ञान अर्थव्यवस्था का निर्माण संस्थान प्रणाली और संस्कृति करती है ज्ञान व्यवस्था बुनियादी ढांचा संसाधन तथा मानव क्षमता का विकास कर उनसे रोजगार सृजन आर्थिक विकास उत्पादकता पारदर्शिता जवाबदेही तथा समृद्धि जैसे परिणाम हासिल करती है ज्ञान संरक्षण मानव विकास में आधार स्तंभों का कार्य करते हैं।

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