यूरोप वासियों का आगमन

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1.1 पृष्ठभूमि

मुगल साम्राज्य की सैनिक तथा सांस्कृतिक उपलब्धियां जो भी रही हो मुगल सम्राट देश की विभिन्न जातियों में एक राष्ट्र की भावना जगाने अथवा सामूहिक रूप से साथ लेकर चलने में पूर्णतया असफल रहे थे। औरंगजेब की मृत्यु के बाद, मुगल साम्राज्य के विघटन की प्रक्रिया तीव्र हो गई थी वहीं दूसरी ओर यूरोपीय देश समुद्री नेविगेशन के क्षेत्र में अपनी प्रगति और अपनी व्यापारिक महत्वाकांक्षा के कारण “ईस्ट इंडीज” के साथ व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करने की तलाश में थे। इनके लिए भारत स्पष्ट रूप से एक प्रमुख लक्ष्य था, क्योंकि यह व्यापार और मुनाफाखोरी के लिए अधिकतम अवसर प्रदान कर रहा था इस प्रकार भारत आने वाली यूरोपीय शक्तियों में पुर्तगाली प्रथम थे।

1.2 पुर्तगाली

वास्कोडिगामा के भारत आगमन से पुर्तगालियों एवं भारत के मध्य व्यापार के क्षेत्र में एक नए युग का आरंभ हुआ।वास्कोडिगामा के भारत आने से और भी पुर्तगालियों का भारत आने का क्रम प्रारंभ हो गया पुर्तगालियों के भारत आने के दो प्रमुख उद्देश्य थे~

  • अरबों और वेनिस के व्यापारियों का भारत से प्रभाव समाप्त करना।
  • भारत में ईसाई धर्म का प्रचार करना।

पुर्तगाल सरकार

पुर्तगाल सरकार ने व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करने के लिए पुर्तगाली ट्रेंडिंग कंपनी की स्थापना की। कंपनी वायसराय के नियंत्रण के अंतर्गत काम करती थी। फ्रांसिस्को डी अलमेडा (1505) भारत का पहला पुर्तगाली वायसराय था। उसने ब्लू वाटर पॉलिसी की शुरुआत की जिसका लक्ष्य समुद्र पर पुर्तगाली आधिपत्यय स्थापित करना एवं केवल व्यापार और वाणिज्य के उद्देश्य के लिए भारत के साथ पुर्तगालीी संबंधों को सीमित करना था।

अलमेडा के बाद अल्फांसो डी अल्बुकर्क 1509 मैं पुर्तगालियों का वायसराय बनकर भारत आया।इसे भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक माना जाता है यह भारत ने दूसरा पुर्तगाली वायसराय था इसने कोचीन को अपना मुख्यालय बनाया।

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