2.2.1 विदेशों से प्राप्त निवल साधन (कारक) आय (Net Factor Income from Abroad: NFIA)

विदेश से प्राप्त निवल साधन आय(NFIA) वस्तुतः एक देश के नागरिकों और कंपनियों द्वारा विदेशों से प्राप्त कुल आय और उस देश में विदेशी नागरिकों और विदेशी कंपनियों द्वारा अर्जित कुल राशि के मध्य का अंतर है। संक्षेप में, NFIA = GNP-GDP हालांकि वर्तमान समय में अधिकांश देशों की NFIA बहुत ही कम है क्योंकि […]

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2.4 मूल्यह्रास (Depreciation)

उत्पादन प्रक्रिया में दूसरी वस्तुओं के उत्पादन में प्रयुक्त सभी मशीनों और उपकरणों में कुछ टूट-फूट होती रहती है आर्थिक बोलचाल की भाषा में ऐसी पूंजीगत वस्तुओं की वह हानि जिसका प्रत्येक अर्थव्यवस्था को टूट-फूट (Wear and tear) के रूप में भुगतना पड़ता है मूल्यह्रास कहलाता है। अर्थव्यवस्था में उत्पादित पूंजीगत वस्तुओं के एक भाग […]

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2.2 सकल राष्ट्रीय उत्पाद

GNP और GDP की अवधारणाएं परस्पर घनिष्ठ रूप से संबंधित है जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है कि GDP की अवधारणा का अर्थ एक निश्चित समय अवधि में किसी देश की घरेलू सीमा निवासियों और गैर निवासियों दोनों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्यों से है। इस प्रकार GDP में ‘उत्पादन किसके […]

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2.1.1 सांकेतिक GDP एवम वास्तविक GDP

सांकेतिक GDP: जब वस्तुओ एवम सेवाओं के मूल्य की गड़ना चालू वर्ष की कीमतों पर (Current year prices) की जाती है तो वह चालू मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद अर्थात सांकेतिक GDP कहलाता है । वास्तविक (Real) GDP : जब वस्तु एवं सेवाओं के मूल्य की गणना आधार वर्ष की कीमतों पर की जाती है, […]

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यूरोप वासियों का आगमन

1.1 पृष्ठभूमि मुगल साम्राज्य की सैनिक तथा सांस्कृतिक उपलब्धियां जो भी रही हो मुगल सम्राट देश की विभिन्न जातियों में एक राष्ट्र की भावना जगाने अथवा सामूहिक रूप से साथ लेकर चलने में पूर्णतया असफल रहे थे। औरंगजेब की मृत्यु के बाद, मुगल साम्राज्य के विघटन की प्रक्रिया तीव्र हो गई थी वहीं दूसरी ओर […]

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आर्थिक संवृद्धि

सन् 1960 से पहले तक आर्थिक संवृद्धि को आर्थिक विकास के रूप में देखा जाता था। इस पारंपरिक नजरिए में यह माना जाता था कि यदि किसी देश में सकल घरेलू उत्पाद के स्तर पर 5 से 7 प्रतिशत की वृद्धि हो रही हो एवम अर्थव्यवस्था का संरचनात्मक रूपांतरण कृषि से उद्योगों की तरफ हो […]

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आर्थिक विकास (Economic-Development)

आर्थिक विकास एक व्यक्तिनिष्ठ या आत्मनिष्ठ संकल्पना है जिसमे राष्ट्रीय आय एवम उत्पादन पर ही बल न देकर समग्र मानवीय विकास पर बल दिया जाता है। दरअसल विकास का अर्थ सकारात्मक परिवर्तन से है और इसके अंतर्गत सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, गुणात्मक एवम परिणात्मक सभी प्रकार के परिवर्तन सम्मिलित होते हैं। जहां आर्थिक परिवर्तन से तात्पर्य […]

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मराठा साम्राज्य

मुगल साम्राज्य के विरोध स्वरूप उत्पन्न अन्य सभी शक्तियों की तरह, मराठों का भी मुगल साम्राज्य द्वारा किए गए दमन तथा 27 वर्षों के युद्ध का इतिहास रहा है। यह 1681 में औरंगजेब के नेतृत्व में मुगलों द्वारा मराठा साम्राज्य पर आक्रमण के साथ प्रारंभ हुआ। जब औरंगजेब की चालीस साल के असफल दक्कन युद्ध […]

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3.3.1 राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP)

NHDP को निम्नलिखित 7 चरणों में लागू किया जा रहा है: स्वर्णिम चतुर्भुज तथा उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर (NHDP I aur II) को 4 लेन करना 12,109 किमी का उन्नयन (NHDP III) 20,000 किमी सड़क को दोहरी लेन वाला करने का प्रस्ताव (NHDP-IV) 6,50P किमी सड़कों को 6 लेन करने का प्रस्ताव (NHDP-V) 1000 किमी […]

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3.3 आर्थिक विकास की महालनोबिस रणनीति

हमारे देश में नियोजित आर्थिक विकास के लिए अपनाई जाने वाली उचित रणनीति को लेकर मतभेद की स्थिति रही है। ऐसे में पहली पंचवर्षीय योजना बिना किसी स्पष्ट रणनीति के समाप्त हो गई। हालांकि दूसरी योजना के दौरान प्रो. पी.सी. महलानोबिस ने एक विकास मॉडल तैयार किया। इस मॉडल में उन्होंने दर्शाया कि भारत को […]

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