न्यू डेवलपमेंट बैंक

हाल ही में ‘मिस्र’ ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ (NDB) का नौवाँ सदस्य बन गया है। इससे पूर्व सितंबर माह में बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात और उरुग्वे ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ में नए सदस्यों के तौर पर शामिल हुए थे। ज्ञात हो कि न्यू डेवलपमेंट बैंक द्वारा सदस्यता के विस्तार से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिये एक प्रमुख विकास […]

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विश्व व्यापार संगठन (WTO)

चर्चा में क्यों? नाइजीरिया की एन्गोज़ी ओकोंजो-इवेला (Ngozi Okonjo-Iweala) को विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organisation- WTO) का महानिदेशक नियुक्त किया गया है। एन्गोज़ी ओकोंजो-इवेला पहली अफ्रीकी अधिकारी होने के साथ-साथ विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला भी है। प्रमुख बिंदु: विश्व व्यापार संगठन का गठन: WTO को वर्ष […]

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मुद्रा (Money)

*कागजी मुद्रा का इतिहास और मुद्रा सृजन प्रकिया .यघपि सोने और चांदी जैसी मूल्यवान धातुआो ने कई वर्षो तक भली भाती प्रकार से मुद्रा के अपेक्षित कार्यो की पूर्ति की तथा साथ ही भौतिकउत्पादकों को एक साथ स्थान से दूसरे स्थान ले जाने की तुलना में सोने के सिक्के से जाना सरल भी होता था […]

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1.2 समाजवाद

समाजवाद का आंसर समाज के एक आर्थिक संगठन से है जिसमें उत्पादन के भौतिक साधन पर संपूर्ण समुदाय का स्वामित्व होता है यह आर्थिक संगठन समुदाय के प्रति उत्तरदाई होता है एवं उनके प्रतिनिधि निकायों द्वारा संचालित होते हैं समान अधिकारों के आधार पर समुदाय के सभी सदस्यों को इस प्रकार के सामाजिक योजनाबद्ध उत्पादन […]

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1. आर्थिक प्रणालियां

वर्तमान में किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को पूर्णतः पूंजीवादी अर्थव्यवस्था अथवा पूर्णता समाजवादी अर्थव्यवस्था की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता हालांकि वर्गीकरण के उद्देश्य विभिन्न आर्थिक प्रणाली को निम्नलिखित वर्गों में विभक्त किया जा सकता है – 1.1 पूंजीवाद पूंजीवाद के अंतर्गत सभी कृषि क्षेत्रों कारखानों एवं उत्पादन के अन्य साधनों पर निजी […]

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व्यापार क्षेत्र

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत द्वारा अपनाई गई व्यापार नीति की सबसे प्रमुख विशेषता इसका औद्योगिक नीति से गणेश रूप से जुड़ा होना था व्यापार नीति को निर्धारित करने हेतु औद्योगिक नीति को आधार बनाया गया। इस समय अधिकांश उद्योग सूती वस्त्र पटसन आदि तक ही सीमित है मात्र जमशेदपुर और कोलकाता में लोहा एवं […]

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उद्योग क्षेत्र

स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत का उद्योग और व्यापार क्षेत्र अत्यधिक पिछड़ेपन का शिकार था। किसी राष्ट्र की प्रगति के लिए अच्छे औद्योगिक क्षेत्र को का होना अनिवार्य होता है क्योंकि उद्योग कृषि क्षेत्र के अपेक्षा अधिक स्थाई रोजगार उपलब्ध कराते हैं औद्योगिक क्षेत्रों से आधुनिकीकरण और समग्र समृद्धि को बढ़ावा मिलता है उपयुक्त कारणों […]

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नियोजित विकास रणनीति के प्रभावों का क्षेत्रवार वर्णन

कृषि क्षेत्र : औपनिवेशिक शासन काल में कृषि क्षेत्र में ना तो कोई विशेष समृद्धि हुई ना ही उससे जुड़े लोगों को जीवन स्तर में बदलाव आया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के नीति निर्माताओं ने कृषि क्षेत्र के मुद्दों पर विशेष जोर डालते हुए भू सुधार तथा उच्च पैदावार वाली किस्म के बीजों […]

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विकास ले लिए ज्ञान

विगत 5 दशकों में एशिया के दिन अग्रणी देशों ने ज्ञानार्जन तथा ज्ञान सृजन में निवेश उन्होंने अन्य देशों के मुकाबले अधिक तेजी से प्रगति की ओर उनके अनुभवों से यह सीखना जरूरी है कि हमें ज्ञान का सृजन अर्जुन संयोजन तथा प्रसार में निवेश करना चाहिए ताकि सामाजिक स्थितियों में सुधार और आर्थिक गतिविधियां […]

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ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में भारत

उदीयमान ज्ञान अर्थव्यवस्था में भारत को बड़ी संख्या में उच्च क्षमता युक्त मानव संसाधन की आवश्यकता होगी हमारी सबसे बड़ी ताकत उस स्त्री कौशल की उपलब्धता है सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमें कक्षा आधिकारिक स्वीकृति हासिल हो रही है भारत में प्रतिस्पर्धी यों को पकड़ने में सफल रहे लेकिन इस स्थिति को बनाए रखने […]

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