3.3.1 राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP)

NHDP को निम्नलिखित 7 चरणों में लागू किया जा रहा है: स्वर्णिम चतुर्भुज तथा उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर (NHDP I aur II) को 4 लेन करना 12,109 किमी का उन्नयन (NHDP III) 20,000 किमी सड़क को दोहरी लेन वाला करने का प्रस्ताव (NHDP-IV) 6,50P किमी सड़कों को 6 लेन करने का प्रस्ताव (NHDP-V) 1000 किमी […]

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3.3 आर्थिक विकास की महालनोबिस रणनीति

हमारे देश में नियोजित आर्थिक विकास के लिए अपनाई जाने वाली उचित रणनीति को लेकर मतभेद की स्थिति रही है। ऐसे में पहली पंचवर्षीय योजना बिना किसी स्पष्ट रणनीति के समाप्त हो गई। हालांकि दूसरी योजना के दौरान प्रो. पी.सी. महलानोबिस ने एक विकास मॉडल तैयार किया। इस मॉडल में उन्होंने दर्शाया कि भारत को […]

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2. क्षेत्रीय शक्तियों का उदय

2.1 पृष्ठभूमि 1761 तक , मुगल साम्राज्य केवल नाम मात्र के लिए साम्राज्य रह गया था, क्योंकि इसकी कमजोरियों ने स्थानीय शक्तियों को स्वतंत्र होने का अवसर प्रदान किया।फिर भी , मुगल सम्राट की प्रतीकात्मक सत्ता बनी रही, क्योंकि उन्हें अभी भी राजनीतिक वैधता का स्त्रोत माना जाता था। नए राज्यों ने प्रत्यक्ष रुप से […]

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3.2 श्रम की असीमित आपूर्ति के साथ आर्थिक विकास का लुइस मॉडल

लुइस ने श्रम की असीमित आपूर्ति के उपयोग के माध्यम से आर्थिक विकास का एक सिद्धांत प्रस्तुत किया। अल्प विकसित देशों में सामान्यतः निर्वाह वेतन पर श्रम की असीमित आपूर्ति उपलब्ध होती है। श्रम की यह असीमित आपूर्ति अधिशेष कृषि श्रम, अनौपचारिक श्रम, घरेलू नौकर, परिवारों में महिलाओं आदि के रूप में होती है। लुइस […]

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मुगलों के पतन के क्या परिणाम हुए

ब्रिटिश शासन के लिए भारत के द्वार खुल गए। भारतीयों को एक सूत्र में बांधने वाली कोई प्रणाली नहीं रही। ऐसी कोई ताकत नहीं रही जो पश्चिम से आने वाली शक्तियों से लड़ सके। स्थानीय राजनीतिक और आर्थिक शक्तियां अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने लगी। कई रियासतें स्वतंत्र हो गई, जैसे कि बंगाल, अवध […]

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3. नियोजन प्रक्रिया में प्रयुक्त मॉडल (Models used in the Planning Process)

3.1 हैरोड-डोमर विकास मॉडल हैरोड और डोमर ने निवेश एवम मांग की गतिशील प्रकृति का विश्लेषण किया तथा यह प्रदर्शित किया कि किस प्रकार पूंजी तथा मांग में भिन्नताएं आर्थिक वृद्धि में अस्थिरता हेतु उत्तरदायी थीं। आर्थिक विकास के मुख्य निर्धारक है : प्राकृतिक संसाधन, तकनीकी प्रगति, जनसंख्या वृद्धि इत्यादि। आर्थिक विकास के ये निर्धारक […]

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2. आर्थिक विकास (Economic Development)

यद्यपि कुछ विशेषज्ञों द्वारा आर्थिक विकास को आर्थिक संवृद्धि और आर्थिक प्रगति से भिन्न अर्थों में परिभाषित किया जाता है, तथापि इस विषय की समझ विकसित करने हेतु हम इन शब्दों को समानार्थी मान सकते है। इस प्रकार हम आर्थिक विकास की परिभाषा को प्रति व्यक्ति आय पर आधारित कर सकते हैं। हम यह भी […]

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1.3 मिश्रित अर्थव्यवस्था

मिश्रित अर्थव्यवस्था न तो शुद्ध रूप से पूंजीवाद है और न ही शुद्ध रूप से समाजवाद है ; अपितु यह दोनो का मिश्रित रूप है। इस अर्थव्यवस्था में निजी उद्यमों और सार्वजनिक दोनो प्रकार के उद्यमों द्वारा संचालित होती है। इस अर्थव्यवस्था में निजी उद्यमों को मूल्य तंत्र के माध्यम से स्वतंत्र और अनियंत्रित रूप […]

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1.2 समाजवाद

समाजवाद का आशय समाज के एक आर्थिक संगठन से है, जिसमें उत्पादन के भौतिक साधन पर संपूर्ण समुदाय का स्वामित्व होता है। यह आर्थिक संगठन, समुदाय के प्रति उत्तरदायी होता है एवम उनके प्रतिनिधि निकायों द्वारा संचालित होता है। समान अधिकारों के आधार पर समुदाय के सभी सदस्यों का इस प्रकार के सामाजिक योजनाबद्ध उत्पादन […]

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1. आर्थिक प्रणालियाँ

वर्तमान में किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को पूर्णतः पूंजीवादी अर्थव्यवस्था अथवा पूर्णतः समाजवादी अर्थव्यवस्था की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता ! हालाँकि, वर्गीकरण के उद्देश्य से विभिन्न आर्थिक प्रणालियों को निम्नलिखित वर्गों में विभक्त किया जा सकता है : 1.1 पूंजीवाद :- i) पूंजीवाद के अंतर्गत, सभी कृषि क्षेत्रों, कारखानों एवं उत्पादन के […]

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