1.2 समाजवाद

समाजवाद का आंसर समाज के एक आर्थिक संगठन से है जिसमें उत्पादन के भौतिक साधन पर संपूर्ण समुदाय का स्वामित्व होता है यह आर्थिक संगठन समुदाय के प्रति उत्तरदाई होता है एवं उनके प्रतिनिधि निकायों द्वारा संचालित होते हैं समान अधिकारों के आधार पर समुदाय के सभी सदस्यों को इस प्रकार के सामाजिक योजनाबद्ध उत्पादन […]

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विकास ले लिए ज्ञान

विगत 5 दशकों में एशिया के दिन अग्रणी देशों ने ज्ञानार्जन तथा ज्ञान सृजन में निवेश उन्होंने अन्य देशों के मुकाबले अधिक तेजी से प्रगति की ओर उनके अनुभवों से यह सीखना जरूरी है कि हमें ज्ञान का सृजन अर्जुन संयोजन तथा प्रसार में निवेश करना चाहिए ताकि सामाजिक स्थितियों में सुधार और आर्थिक गतिविधियां […]

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ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में भारत

उदीयमान ज्ञान अर्थव्यवस्था में भारत को बड़ी संख्या में उच्च क्षमता युक्त मानव संसाधन की आवश्यकता होगी हमारी सबसे बड़ी ताकत उस स्त्री कौशल की उपलब्धता है सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमें कक्षा आधिकारिक स्वीकृति हासिल हो रही है भारत में प्रतिस्पर्धी यों को पकड़ने में सफल रहे लेकिन इस स्थिति को बनाए रखने […]

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ज्ञान अर्थव्यवस्था

डिजिटल क्रांति में मनुष्य के लिए अवसरों के नए द्वार खोल दिए हैं जिसकी बदौलत ज्ञान अर्थव्यवस्था के तहत व्यक्ति समृद्धि और धन उपार्जन कर सकता है। नई तकनीक ने दुनिया भर में ज्ञान क्रांति के जरिए अंतर निर्भरता का बोध बढ़ाया है जिससे भूमंडलीय अंतर संवाद व्यापक सघन त्वरित तथा प्रभावी हुआ है। विश्व […]

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2.5 निवल घरेलू उत्पाद (Net Domestic Product : NDP)

‘मूल्यह्रास’ की राशि को समायोजित करने के बाद जब जीडीपी की गणना की जाती है जैसे GDP को ही NDP कहते हैं वस्तुतः NDP निवल GDP ही है साधारण शब्दों में वस्तुओं और सेवाओं के पादन के दौरान परिसंपत्तियों में होने वाले टूट-फूट की कुल राशि को GDP में से घटाने पर NDP प्राप्त होता […]

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3. राष्ट्रीय आय को प्रभावित करने वाले कारक

कई ऐसे कारक हैं जो किसी देश की राष्ट्रीय आय को प्रभावित करते हैं उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं- उत्पादन के कारक (Factor Of Production) : सामान्यतया जब संसाधन अधिक कुशल और समृद्ध होंगे तो निश्चय ही राष्ट्रीय आय या GNP का स्तर उच्चतर होगा। भूमि (Land): भारी उद्योगों के लिए कोयला और लकड़ी जैसे […]

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2.11 व्यक्तिगत प्रयोज्य आय

व्यक्तिगत प्रयोज्य (व्यय योग्य) आय से आशय किसी व्यक्ति के पास उपलब्ध वास्तविक व्यय योग्य राशि से है।इसका अर्थ व्यक्तिगत रूप से भुगतान किए गए करों, जैसे- आय कर, संपत्ति कर, प्रोफेशनल टैक्स आदि के भुगतान के बाद व्यक्ति के पास बची हुई राशि से है। इस प्रकार, व्यक्तिगत प्रयोज्य आय = व्यक्तिगत आय – […]

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राष्ट्रीय आय (National Income: NI)

राष्ट्रीय आय वस्तुतः एक लेखा वर्ष की अवधि के दौरान एक देश के निवासियों द्वारा अपने गृह देश व विदेशों अपनी भूमि श्रम पूंजी और उद्यमी प्रतिभा द्वारा अर्जित कारक/साधन आय का कुल योग है। यह साधन लागत पर निबंध राष्ट्रीय उत्पाद के बराबर होता है इसे बाजार मूल्य पर NNP में से निवल अप्रत्यक्ष […]

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2.2.1 विदेशों से प्राप्त निवल साधन (कारक) आय (Net Factor Income from Abroad: NFIA)

विदेश से प्राप्त निवल साधन आय(NFIA) वस्तुतः एक देश के नागरिकों और कंपनियों द्वारा विदेशों से प्राप्त कुल आय और उस देश में विदेशी नागरिकों और विदेशी कंपनियों द्वारा अर्जित कुल राशि के मध्य का अंतर है। संक्षेप में, NFIA = GNP-GDP हालांकि वर्तमान समय में अधिकांश देशों की NFIA बहुत ही कम है क्योंकि […]

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2.4 मूल्यह्रास (Depreciation)

उत्पादन प्रक्रिया में दूसरी वस्तुओं के उत्पादन में प्रयुक्त सभी मशीनों और उपकरणों में कुछ टूट-फूट होती रहती है आर्थिक बोलचाल की भाषा में ऐसी पूंजीगत वस्तुओं की वह हानि जिसका प्रत्येक अर्थव्यवस्था को टूट-फूट (Wear and tear) के रूप में भुगतना पड़ता है मूल्यह्रास कहलाता है। अर्थव्यवस्था में उत्पादित पूंजीगत वस्तुओं के एक भाग […]

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