सहिष्णुता और UNESCO

Ethics संघ लोक सेवा आयोग

सामान्यतः बोलचाल की भाषा में सहिष्णुता शब्द का प्रयोग धार्मिक मतांतर और विरोधाभास की स्थिति में सामंजस्य स्थापित करने के लिए किया जाता रहा है। परंतु सहिष्णुता इसमें भी कुछ अधिक है। UNESCO के अनुसार (सहिष्णुता के सिद्धांत पर घोषणापत्र 1995) सहिष्णुता वैश्विक परिप्रेक्ष्य में निम्न रूप से परिभाषित की जा सकती है –

  1. सहिष्णुता प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य (Moral Duty) है जहां मतांतर और मतभेद की स्थिति में दूसरे की भावनाओं और विचारों के प्रति सम्मान (Respect), स्वीकार्यता (accept) और प्रोत्साहन (Promote) की भावना होनी चाहिए।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उपरोक्त विचारधारा पर बल दिया जाए तो जिस प्रकार से धार्मिक, जातिगत और भाषाई आधार पर समाज और व्यक्ति के बीच विरोधाभास देखने को मिल रहा है उस स्थिति में एक दूसरे की भावनाओं के प्रति सम्मान रखे उनके तत्वों को स्वीकार करे और अच्छाइयों को प्रोत्साहित करने का प्रयास करे तो सहिष्णुता की स्थिति उत्पन्न होगी।

2. सहिष्णुता युद्ध की संस्कृति के स्थान पर शांति की संस्कृति की स्थापना का आधार है।

3. बहुसंख्यक और

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *