मुद्रास्फीति के प्रकार( कारण के आधार पर मुद्रास्फीति के प्रकार)

Indian economy संघ लोक सेवा आयोग
  1. मांग जनित मुद्रास्फीति (Demand Pull Inflation)

यह किसी भी अर्थव्यवस्था में मांग में बढ़ोत्तरी के कारण उत्पन्न होती है। यदि उपभोक्ता के पास आय में बढ़ोत्तरी के कारण अथवा बैंकों से कम ब्याज दर पर ऋण की प्राप्ति के कारण ज्यादा धन राशि बचे तब ऐसे में मांग में बढ़ोत्तरी होती है। यदि मांग में इस बढ़ोत्तरी की पूर्ति सही मात्रा में सही समय पर आपूर्ति के माध्यम से सुनिश्चित न हो पाए तब मूल्यों में बढ़ोत्तरी होगी इसे मांग जनित मुद्रास्फीति कहते है। भारत जैसे विकासशील देशों में रोजगार के अवसर निरंतर उत्पन्न होते है। इसके कारण मांग निरंतर बढ़ती है। अतः ऐसी अर्थव्यवस्थाओं में मांग जनित मुद्रास्फीति एक सामान्य परिस्थिति है। जब भी सरकार मनरेगा जैसी कल्याणकारी योजनाएं लागू करती है सार्वजनिक व्यय में बढ़ोत्तरी होती है एवम मांग जनित मुद्रास्फीति उत्पन्न होती है।(MGNREGA – Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act)

प्रत्येक देश बेरोजगारी के दर को कम करने का प्रयास करता है, परन्तु बेरोजगारी के दर में कमी के कारण मुद्रास्फीति उत्पन्न होगी। यही कारण है कि प्रत्येक देश NAIRU ( Non Accelerating Inflation Rate of Unemployment) की अवधारणवका अनुपालन करते है। इस अवधारणा के अंतर्गत बेरोजगारी की दर को उस गति से कम किया जाता है जिस पर मुद्रास्फीति नियंत्रण से बाहर न चली जाए।

परन्तु मांग जनित मुद्रास्फीति आर्थिक संवृद्धि से सम्बन्धित होती है। वह मुद्रास्फीति जो नियंत्रण में होती है किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत है। यह दर्शाता है की लोगो के पास पैसा है वे उपभोग कर रहे है। अतः ऐसी अर्थव्यवस्थाओं में नए निवेश देखे जा सकते है।

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