गणराज्य

Ancient History संघ लोक सेवा आयोग

600 BC में राजनीति का एक दूसरा प्रकार गणतंत्रात्मक था। हिमालय की तराई ( पूर्वी यूपी से बिहार के बीच) में उस समय 10 गणराज्यों की सूचना मिलती है। इसमें वैशाली, मिथिला के विदेह, रामग्राम के कोलिय ( बुद्ध की माता इसी गणराज्य में थी) , पावा तथा कुशीनार के मल्ल प्रमुख थे।

तंत्रमात्मक राजनीति की विशेषताएं :

बुद्धकालीन गणराज्यों में राजनीति गणतंत्रात्मक प्रकार की थी जो निम्न है –

  1. गणराज्यों के सभी सदस्य समान हैसियत रखते थे। ये राजा की उपाधि ग्रहण करते थे। लिच्छवियों में 7707 राजाओं की सूचना मिलती है।
  2. सदस्यों के बीच से ही 10 वर्ष के लिए गणप्रमुख का चुनाव किया जाता था।
  3. सामान्य प्रशासन चलाने के लिए राजतंत्रो की भांति इसमें भी सेनापति, कर संग्राहक अधिकारी, विदेश मंत्री आदि का पद होता था।
  4. इनकी न्यायिक प्रणाली काफी प्रगतिशील थी। लिच्छवियों में मृत्युदंड प्राप्त व्यक्ति को 8 न्यायालयों से गुजारने की जानकारी मिलती है।

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