प्रजातांत्रिक प्रक्रियाएं

Ancient History संघ लोक सेवा आयोग

गणराज्यों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इनकी प्रजातांत्रिक प्रक्रियाएं थी। ये बड़े बड़े संस्थागारो (सभाभवन) में बैठक करते थे। सभा के संचालन के लिए अध्यक्ष (आसन्न प्राशन) होता था। कोरम (गणपूर्ति) का ध्यान रखा जाता था। मुद्दों पर चर्चा एवम बहस होती थी। गुप्त मतदान किया जाता था एवम बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता था।

मूल्यांकन:

आधुनिक दृष्टि से देखा जाए तो कहा जा सकता है की ये आज की भांति वास्तविक गणतंत्र नही थे। ये अल्प्तत्रीय थे। केवल क्षत्रीय वर्ग के लोग इसके सदस्य थे। उनमें भी उनकी महिलाएं शामिल नहीं होती थी। यही कारण है की विद्वानों ने इन्हे ‘कुलीन तंत्र’ कहा है।

फिर भी भारतीय राजनीति के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक प्रकार की राजनीति का दुनिया में यह प्रथम प्रयोग था।

गणराज्यों का पतन :

बुद्धकाल में ही तराई के गणराज्यों का पतन हो गया जिसके निम्न कारण थे-

  1. मगध की विस्तारवादी नीति। (अजातशत्रु ने इनके खिलाफ कठोर युद्ध नीति अपनाई। अपने मंत्रियों के माध्यम से फूट डालने का कार्य किया।)
  2. गणराज्यों के सदस्यों के बीच आपसी एकजुटता का अभाव था।
  3. ये आकार में काफी छोटे थे अतः इनकी शक्ति की भी सीमाएं थी। इन्होंने राजतंत्रों जैसी नीति अपनाने की कोशिश की जो इनके अनुकूल नही थी।

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