भारत परिषद अधिनियम 1892

Polity संघ लोक सेवा आयोग

1857 में हुई राज्य क्रांति तथा शिक्षा के प्रसार ने भारतीयों में राष्ट्रीयता की भावना को सुदृढ़ किया। 1885 में कांग्रेस की स्थापना तथा इलवर्ट बिल विवाद के पश्चात भारतीयों को प्रशासन तथा विधि निर्माण में और अधिक प्रतिनिधित्व देने के मांग ने काफी जोर पकड़ लिया, जिसके फलस्वरूप यह अधिनियम पारित किया गया।

प्रावधान :

  1. इस अधिनियम के द्वारा भारत में केंद्रीय विधान परिषद के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर न्यूनतम 10 एवम अधिकतम 16 कर दी गई।
  2. केंद्रीय विधानपरिषदो के अधिकारों में वृद्धि की गई एवम परिषद के सदस्य बजट मामलों पर प्रश्न पूछ सकते थे और बहस भी कर सकते थे, किंतु उन्हें पूरक प्रश्न पूछने एवम बहस पर मतदान जा अधिकार नहीं था।
  3. इस अधिनियम का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु भारत में पहली बार निर्वाचन पद्धति प्रारंभ करना था जिसके अंतर्गत केंद्रीय विधानमंडल के 5 और सरकारी सदस्य कलकत्ता के वाणिज्य मंडल के सदस्यों द्वारा निर्वाचित होने लगे थे।
  4. बंबई, मद्रास और बंगाल प्रांतों में न्यूनतम 8 तथा अधिकतम 20 सदस्य तथा उत्तर पश्चिमी प्रांत में अधिकतम 15 अतिरिक्त सदस्य नियुक्त किए गए।
  5. प्रांतीय परिषदों के गैर सरकारी सदस्य नगरपालिका, जिला बोर्ड, विश्वविद्यालय तथा वाणिज्य मंडल द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित किए जाते थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *