सत्यनिष्ठा और भ्रष्टाचार : 2

Ethics संघ लोक सेवा आयोग

वर्तमान समय में आधुनिकता का संदर्भ नकारात्मक होता जा रहा है। सामाजिक पहचान आर्थिक संवृद्धि और संप्रभुता हो गई है। समाज में लोग आने वाली भावी पीढ़ियों को तकनीक और व्यवसायिक सक्षमता प्रदान करना चाहते है। परंतु चारित्रिक मूल्यों में ह्रास के कारण थोड़ी सी विपरीत परिस्थिति में भावी पीढ़ी अपनी आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए एक अनुचित माध्यमों का सहारा लेती है।

उदाहरण के लिए परीक्षा में नकल करना, Question Paper Out करना, परीक्षा के दौरान नशा इत्यादि का सहारा लेना, किसी ऐसे संक्षिप्त मार्ग की तलाश करना जो अल्पसमय में सुख की प्राप्ति दिला सकें। इसके अलावा समाजीकरण की प्रक्रिया में भी परिवार, समाज और शिक्षण संस्थान भौतिक और तकनीकी संदर्भों को ही विशेष महत्व दे रहे हैं। परिणामतः तकनीक का प्रयोग करने वाला मानव अपने भावनात्मक सरोकारों से बाहर निकलकर व्यवहार में शुष्क होता जा रहा है। समाज में विश्वास शून्यता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस प्रकार वर्तमान भ्रष्टाचार की समस्या को दूर करने के लिए सर्वप्रथम समाजीकरण के सभी घटकों को व्यक्ति के चरित्र निर्माण पर बल देना होगा और यह चरित्र निर्माण सत्यनिष्ठा के आधारशिला पर टिका होता है।

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