सत्यनिष्ठा और सिविल सेवकों के स्वविवेक के निर्णय में संबंध

Ethics संघ लोक सेवा आयोग

CSCC 1964 के अनुसार एक लोकसेवक/ सिविलसेवक को हमेशा व्यक्तित्व के स्तर पर सत्यनिष्ठा के मूल्य को धारण करना चाहिए। आचरण संहिता का मानना है कि एक सिविल सेवक को जो की संस्था के उच्च स्तर पर कार्य कर रहा होता है। स्वविवेक के आधार पर निर्णय लेते समय व्यक्ति अपने अंतः प्रज्ञा (Intution) के आधार पर निर्णय लेता है। प्रत्येक व्यक्ति की अंतः प्रज्ञा अलग-अलग होता है। अतः संभव है कि जब एक सिविल सेवक निर्णय लेते समय अपने अंतः प्रज्ञा का प्रयोग करे तो वह अपनी भावनाओं से प्रभावित हो जाए और निर्णय में पक्षपात उत्पन्न हो जाए अतः सिविल सेवकों को अपने व्यक्तित्व के स्तर पर सदैव सत्यनिष्ठा के मूल्य को धारण करना चाहिए ताकि उसके अंतः प्रज्ञा से उत्पन्न भावनाएं सत्यनिष्ठा के मूल्य से शासित हों क्युकी सत्यनिष्ठा सदैव मानदंडों के आधार पर ही निर्णय लेने का आधार प्रदान करती है।

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