समानुभूति शून्यता क्या है ? ( According to world Bank) : Epathy Deficit

Ethics संघ लोक सेवा आयोग

समानुभूति व्यक्तित्व का वह आयाम है जहाँ व्यक्ति सर्वप्रथम अपनी भावनाओं के प्रति जागृत होता है तत्पश्चात इस भावनात्मक जागरूकता के आधार पर दूसरे की पीड़ा को महसूस करने का प्रयास करता है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान वैश्विक समाज में समानुभूतिक शून्यता की स्थिति व्याप्त है। कहने का तात्पर्य यह है कि इस गलाकाट प्रतिस्पर्धा के दौरान व्यक्ति जब अपनी भावनाओं के प्रति सजग नहीं है तो दूसरों के प्रति सायद ही सजग हो पाए। साथ ही साथ वैश्विक स्तर पर भूख, शरणार्थियों का मसला, पर्यावरणीय समस्याएं, बढ़ता सांस्कृतिक गतिरोध, आतंकवाद कि समस्या इत्यादि इस बात को सिद्ध करता है कि एक तरफ जहाँ तकनीकी पहलु का विकास हो रहा है वहीँ दूसरी तरफ मानव की संवेदनाएं तकनीक की गुलाम होती जा रही है। भौतिकता जीवन का साधन न बनकर साध्य बनता जा रहा है। परिणामतः भावनात्मक शून्यतः की स्थिति व्याप्त हो गयी है।

समानुभूतिक शून्यता की समस्या को किस प्रकार दूर किया जाये ?

  1. पारिवारिक स्तर पर
  2. सामाजिक स्तर पर
  3. शैक्षणिक स्तर पर
  4. धार्मिक स्तर पर
  5. शासन प्रक्रिया (Governance) के माध्यम से

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