समानुभूति (Empathy) निर्णय निर्माण प्रक्रिया का एक प्रभावी माध्यम हो सकता है, कैसे?

Ethics संघ लोक सेवा आयोग

निर्णय निर्माण प्रक्रिया में प्रथम अवस्था किसी भी समस्या को सही पहचान से प्रारंभ होती है। यदि निर्णयकर्ता समस्या की प्रकृति को सही रूप से पहचानता है तो वह उचित विकल्पों का निर्माण भी कर पाएगा। वही नीति क्रियान्वयन के दौरान समाज के असक्षम और कमजोर वर्गों तक उन नीति के प्रभाव को पहुंचाने के लिए एक सिविल सेवक को संवेदनशील और समर्पित होना आवश्यक है।

इस प्रकार नीति निर्माण के दौरान एक सिविल सेवक को इन वर्गों के प्रति समानुभूति संवाद स्थापित करते हुए समस्या के Origin (वास्तविक) प्रकृति को समझने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही साथ इस समानुभूति संवाद का कौशल अपनी टीम में भी विकसित करना चाहिए। वहीं नीति क्रियान्वयन के दौरान उस नीति के प्रभाव को समाज के असजग और वंचित वर्गों तक पहुंचाने के लिए उन वर्गों में नीति के प्रति सजगता, अपनी असुविधाओं के लिए प्रशासन से पहल इत्यादि के लिए समानुभूतिक रूप से कार्य करना होगा। साथ ही साथ नीति की सफलता समर्पण की भावना पर निर्भर करती है। समानुभूति भावना को ‘हम’ की स्थिति पर लाकर किसी कार्य को करने के प्रति Passion Quation उत्पन्न करता है जिसे लोकसेवा के प्रति समर्पण की भावना के नाम से भी जानते है और जब व्यक्ति समर्पित स्थिति में रहेगा तब वह विपरीत परिस्थिति में भी अपने मूल्यों के प्रति निष्ठ बना रहेगा। उपरोक्त स्थिति की पुष्टि के लिए निम्नलिखित उदाहरणों का सहारा लिया जा सकता है –

Best MANREGA Implementation Award से सम्मानित मंजू राजपाल राजस्थान के निम्न जाति से संबंधित है। जिन्होंने राजस्थान के अंर्तगत ग्रामीण जनता की मानसिक व आर्थिक स्थिति को समझते हुए MANREGA को प्रभावी तरीके से Implement किया। वहीं संगायम, आर्मस्ट्रांग पामे जैसे सिविल सेवकों द्वारा किए गए पहल समानुभूतिक स्थिति के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है।

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