आर्थिक संवृद्धि एवं आर्थिक विकास ( Economic Growth and Economic development)

Indian economy संघ लोक सेवा आयोग

आर्थिक संवृद्धि एवं आर्थिक विकास एक दूसरे से सम्बंधित तो है परन्तु एक दूसरे के समानार्थी नहीं हैं। संवृद्धि एक मात्रात्मक अवधारणा है जबकि विकास एक गुणात्मक अवधारणा है। आर्थिक संवृद्धि एक निश्चित समय में उत्पादन में बढ़ोतरी अथवा सकल घरेलु उत्पाद में बढोत्तरी को सम्बोधित करती है। इससे भिन्न उत्पादन में बढ़ोत्तरी का लाभ समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे तब इसे आर्थिक विकास कहा जाता है। उदाहरण स्वरुप हरित क्रांति ने खाद्यान्न के उत्पादन को बढ़ावा दिया, इसे संवृद्धि कहा जायेगा परन्तु आज भी भारत में भुखमरी जैसी समस्या उपस्थित है। यह दर्शाता है की विकास की प्रक्रिया अब भी अधूरी है।

अतः यदि खाद्यान्न के उत्पादन में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ देश में खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाये तो यह आर्थिक विकास कहलायेगा। अतः यह कहा जा सकता है किबिना आर्थिक संवृद्धि के आर्थिक विकास संभव नहीं है परन्तु मात्र आर्थिक संवृद्धि के माध्यम से विकास सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *