1833 का चार्टर एक्ट

Polity संघ लोक सेवा आयोग

1813 के चार्टर अधिनियम के पश्चात, भारत में कंपनी के साम्राज्य में काफी वृद्धि हुई, जिस पर समुचित नियंत्रण स्थापित करने के लिए ब्रिटिश संसद ने 1814, 1823 तथा 1829 में अधिनियम द्वारा कंपनी को कुछ अधिकार प्रदान किया , किंतु ये अधिनियम वांछित सफलता न दे सके। अतः 1833 में चार्टर अधिनियम पारित किया गया।

यह अधिनियम बेंथम मैकाले एवम जेम्स मिल के उपयोगितावादी सिद्धांतों पर आधारित था।

प्रावधान: इस अधिनियम के द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा, लॉर्ड विलियम बैंटिक “भारत का पहला गवर्नल जनरल” बना।

इसे पूरे भारत में कानून बनाने का अधिकार दे दिया गया इस प्रकार भारत में पहली बार केंद्रीयकृत व्यवस्था अपनाई गई।

  1. इसके द्वारा कंपनी के व्यापारिक अधिकार पूर्णतः समाप्त कर दिए गए और इसके साथ ही, कंपनी के चाय तथा चीन के व्यापारिक एकाधिकार को भी समाप्त कर दिया गया।अब कंपनी का कार्य ब्रिटिश सरकार की ओर से मात्र शासन करना रह गया ।
  2. बंबई तथा मद्रास की परिषदों की विधि निर्माण शक्तियों को वापस ले लिया गया।
  3. विधिक परामर्श हेतू गवर्नर जनरल की परिषद में विधि सदस्य के रूप में चौथे सदस्य को शामिल किया गया।
  4. इस एक्ट द्वारा सरकारी सेवाओं में रंग, जाति, नस्ल आदि के आधार पर भारतीयों से होने वाले भेदभाव को समाप्त कर दिया गया।
  5. मैकाले की अध्यक्षता में 1835 में पहला विधि आयोग बना।
  6. इस एक्ट द्वारा भारत में दासता को अवैध घोषित किया गया तथा 1843 में उसका उन्मूलन कर दिया गया।
  7. गवर्नल जनरल की परिषद को राजस्व के संबंध में पूर्ण अधिकार प्रदान करते हुए, गवर्नल जनरल को सम्पूर्ण देश के लिए एक ही बजट तैयार करने का अधिकार दिया गया।

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