1813 का चार्टर एक्ट (Charter Act of 1813)

Polity संघ लोक सेवा आयोग

कंपनी के एकाधिकार को समाप्त करने, उस पर और प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा ईसाई मिशनरियों कि भारत में और अधिक स्वायत्ता की मांग के मद्देनजर यह राजलेख पारित किया गया था जिसके अंतर्गत निम्न प्रावधान किए गए थे-

  1. कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार अगले 20 वर्षों के लिए पुनः बढ़ा दिया गया।
  2. इसके द्वारा कंपनी के भारत के साथ व्यापार करने के एकाधिकार को छीन लिया गया, किंतु चीन के साथ व्यापार एवम पूर्वी देशों के साथ-साथ चाय के व्यापार के संबंध में एकाधिकार प्राप्त रहा।
  3. इस चार्टर द्वारा ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की छूट दी गई।
  4. स्थानीय स्वायत्तशासी संस्थाओं को करारोपण का अधिकार दिया गया।
  5. कम्पनी की आय में से भारतीयों में शिक्षा साहित्य और विज्ञान को प्रोत्साहन देने के लिए प्रति वर्ष एक लाख रुपया व्यय करने की व्यवस्था की गई।
  6. इस एक्ट ने कंपनी के कर्मचारियों को नागरिक एवम सैनिक सेवाओं के लिए प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की।
  7. कंपनी के लिए आवश्यक किया गया कि वह व्यापार और राजस्व के लेखों को अलग-अलग रखे ।
  8. भारत में आकर बसने तथा व्यापार करने के लिए आने वाले अंग्रेजों को लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया।

महत्वपूर्ण तथ्य :

  • 1833 के चार्टर के पूर्व निर्मित विधियों को विनिमय कहा जाता था, जबकि इस अधिनियम द्वारा निर्मित विधियां अधिनियम कहलाती थी। दूसरे शब्दों में “भारत के गवर्नर जनरल की परिषद द्वारा निर्मित विधि को अधिनियम कहा जाता था।”
  • 1853 का चार्टर भारतीय शासन (ब्रिटिश कालीन) के इतिहास में अंतिम चार्टर था।

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