स्तूपों के प्रकार

Art and culture संघ लोक सेवा आयोग

स्तूप मुख्य रूप से 4 प्रकार के होते है –

  1. शारीकिक स्तूप : बुद्ध या किसी संत के शारीरिक अवशेषों पर बना।
  2. परिभोगिक स्तूप : संतों/ आचार्यों द्वारा उपभोग की गई वस्तुओं पर बना।
  3. उद्देश्यिक स्तूप : बौद्ध धर्म के प्रचार के उद्देश्य से बना।
  4. पूजार्थक स्तूप : पूजा के उद्देश्य से बना।

स्तूपों का दर्शन:

स्तूपों के निर्माण के पीछे दार्शनिक अवधारणा का प्रभाव था। ऋग्वेद में ऊंची उठती हुई अभिव्यक्तियों ( जैसे- सूर्य की राशि, अग्नि की ज्वाला, वितान लेकर फैले वृक्ष) को स्तूप कहा गया है। इसी प्रकार बौद्ध परंपरा में स्तूपों को आनंद का प्रतीक माना गया है। इसके विभिन्न अंग भिन्न-भिन्न दार्शनिक अवधारणाओं से जुड़े है जैसे – अंड~ शांति का प्रतीक, हर्मिका~ पवित्रता, छत्रावलियां~ चारों दिशाओं में बुद्ध की शिक्षाओं का प्रतीक, वेदिका~ पवित्र भूमि तथा चारों तोरण~ चारों दिशाओं का प्रतीक माने गए है।

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