यूरोप वासियों का आगमन

Uncategorized

डच

  • पुर्तगालियों के बाद डच भारत आए । ये नीदरलैंड या हॉलैंड के निवासी थे। 1592 ईस्वी में ईस्ट इंडीज के साथ व्यापार करने के लिए डच ईस्ट इंडिया कंपनी बनाई गई। कार्नेलियस हाउट मैन भारत आने वाले पहले डच थे।
  • डचों ने तमिलनाडु में नागपट्टनम आंध्र प्रदेश में मछलीपट्टनम बंगाल में चिनसुरा और मालाबार तट पर माहे में व्यापारिक केंद्र स्थापित किए।
  • भारत में डच मुख्यालय नागपट्टनम में स्थापित किया गया डच पुर्तगालियों और अंग्रेजों की कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर सके और इस तरह इन्होंने भारत छोड़ दिया।
  • इंडोनेशिया के व्यापार और वाणिज्य पर डचो का पूर्ण एकाधिकार एक अन्य कारण था जिस कारण उन्होंने भारत पर अपने दावे को छोड़ दिया।

डेनिश

  • डेनमार्क भारत आने वाली एक छोटी औपनिवेशिक शक्ति थी।
  • डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी का गठन 1616 ईस्वी में हुआ था और उन्होंने तमिलनाडु 1620 के ट्रेकोंवार में व्यापारिक आउटपोस्ट स्थापित किया तथा अपने राजा फ्रेडरिकवी के सम्मान में 1755 में सेरामपुर पश्चिम बंगाल के निकट फ्रेडरिकनागौर नामक स्थान पर एक कॉलोनी स्थापित की।
  • डेनमार्क के साथ युद्ध के दौरान अंग्रेजों द्वारा इस पर दो बार कब्जा किया गया था फ्रेडरिक नागौर एक वाणिज्यिक उद्यम के रूप में विफल रहा।

दिनेश लोगों द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण कार्य

  • सन 1799 में विलियम कैरे और उनके दो साथी वरिष्ठ मिशनरियों ने बाइबल की प्रतियां मुद्रित करने के लिए सेरामपुर में एक प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की।
  • 1891 में कैरे ने सेरामपुर कॉलेज स्थापित किया जो एशिया में पश्चिमी शैली की उच्च शिक्षा प्रदान करने वाली पहली संस्था थी।
  • 1827 में डेनमार्क के किंग द्वारा रॉयल चार्टर जारी कर सेरामपुर कॉलेज को कोपेनहेगन के सामान विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दी गई।
  • 1845 में डेनमार्क ने सेरामपुर को ब्रिटेन को सौंप दिया इस तरह बंगाल में करीब 150 वर्षों तक डेनिस उपस्थिति बनी रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *