क्षेत्रीय शक्तियों का उदय

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2.2.2( अवध )

  • अवध प्रांत पश्चिम में कन्नौज जिले से पूर्व में कर्मनाशा नदी तक विस्तृत था।
  • 1722 शआदत खा को सूबेदार नियुक्त किए जाने के साथ ही अवध लगभग स्वतंत्र हो गया था। वह आराजकता समाप्त करने और बड़े जमींदारों को अनुशासित करने में सफल रहा। उसने एक नई राजस्व व्यवस्था भी लागू की जिससे उसके साम्राज्य के वित्तीय संसाधनों में वृद्धि हुई।
  • सआदत खान का उत्तराधिकारी उसका भतीजा सफदरजंग बना, जिसे 1748 में साम्राज्य के वजीर के रूप में नियुक्त किया गया साथ ही उसे इलाहाबाद प्रांत की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
  • 1753 उत्तर भारत के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव दृष्टिगोचर हुआ जब अवध और इलाहाबाद छीन हो रहे हैं साम्राज्य से स्पष्ट रूप से स्वतंत्र होते प्रतीत होने लगे।
  • सफदरजंग की मृत्यु के बाद उसके पुत्र शुजाउदौला को अवध का सूबेदार नियुक्त किया गया । जब अफगान नेता अहमद शाह अब्दाली ने पानीपत के तृतीय युद्ध (1761 ) में मराठों से युद्ध हेतु पुनः भारत आया उस समय शुजाउदौला अपने स्थानीय विरोधी एवं मराठों को कमजोर करने के लिए अफगान आक्रमण कर्ताओं का साथ दिया।
  • उसके अपने क्षेत्र अवध और इलाहाबाद में उसकी स्वायत्तता और शक्ति 1764 में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ युद्ध तक बनी रही। अंग्रेजों और बंगाल के पदच्युत नवाब,मीर कासिम के बीच हुए बक्सर के युद्ध 1764 में शुजाउदौला ने भाग लिया इस युद्ध में हार का सामना करना पड़ा।

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