क्यों करें UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी – पार्ट [1]

तयारी की समग्र रणनीति

सच तो यह है की प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सार्थकता की तलाश करता है। उसकी कोशिश होती है की वह अपनी अभिरुचि, प्रतिभा, रूचि, और योग्यता के अनुसार एक बेहतर और अनुकूल करियर अपनाकर उसमे अपना यथासंभव योगदान कर सके। ऐसा करियर जहां उसके अरमानो को उड़ान भी मिले और अपने काम से संतोष भी ; जहाँ उसे यथासंभव पूर्णतः और सार्थकता का अहसास भी मिले और एक सम्मानजनक आजीविका भी। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर स्वाभाविक तौर पर यह चाह भीं होती है की वह अपने व्यक्तित्व का विकास करते हुए कुछ नया और कुछ अच्छा कर सक। इंसान की यही बड़े सपने देखने की चाहत ही तो है, जो उसे उपलब्धि के सर्वोच्च शिखर पर ले आती है। डॉ कलाम ने यूँ ही नहीं कहा, ” सपने देखो ! सपने विचारो में बदलते हैं और विचार कर्म में।

यूँ तो किसी भी व्यक्ति की कुछ कर गुजरने की चाहत और जिजीवसा या जीवट की अभिव्यक्ति अनेक क्षेत्रों में हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, कोई साहित्य -संगीत-कला आदि के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन कर्म देश दुनिया में नाम कमा सकता हैं तो कोई इंजीनियर या डॉक्टर बनकर अपने अपने क्षेत्र में उत्क्रष्ट्ता को छू सकता हैं। कोई राजनीति या प्रशासन के क्षेत्र में उतारकर देश-समाज की सेवा में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर सकता हैं तो कोई सिनेमा या स्पोर्ट्स के क्षेत्र में अपनी रचनात्मकता की अभिव्यक्ति कर अपना योगदान कर सकता है। हमारे संविधान के मूल कर्तव्यों में लिखा भी हैं –
” व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें, जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नयी ऊंचाइयों को छू ले। “

इस संवैधानिक मूल कर्त्तव्य की मूल भावना यही हैं की प्रत्येक नागरिक चाहे वह किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हो, अपने व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक जीवन दोनों में बेहतरी की कोसिस करे और अपने निरंतर प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ता जाय।

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