1.2.5 सामाजिक कारण

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हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार ने भी सामाजिक असंतोष को बढ़ा दिया था। धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता के अभाव के कारण भी लोगों में आक्रोश की भावना थी गरीबों पर अनावश्यक कर आरोपित कर दिए गए थे सभी गैर मुस्लिम लोगों पर कर लगा दिया गया था।

1.2.6 धार्मिक कारण

औरंगजेब स्वभाव से बड़ा कट्टर था तथा इस्लामी कानून के अनुसार ही कार्य करना चाहता था। परंतु इस कानून का विकास भारत के बाहर बिल्कुल अलग परिस्थितियों में हुआ था और यह उम्मीद नहीं की जा सकते थे कि यह भारत में भी कारगर सिद्ध होगा। औरंगजेब ने कई अवसरो पर अपनी गैर मुसलमान प्रजा की भावनाओं को समझने से इंकार कर दिया। मंदिरों के प्रति अपनाई गई उसकी नीति और इस्लामी कानून के आधार पर जजिया को दोबारा लागू कर के नाते मुसलमानों को अपने पक्ष में कर सका और ना ही इस्लामिक कानून पर आधारित राज्य के प्रति उनकी निष्ठा प्राप्त कर सका। इस नीति के कारण सतनामी बुंदेलों और जाटों ने विद्रोह कर दिया था तब दूसरी ओर इस नीति के कारण हिंदू भी उसके खिलाफ हो गए और ऐसे वर्ग सशक्त हो गए जो राजनीतिक तथा अन्य कारणों से मुगल साम्राज्य के विरुद्ध थे।

1.2.7 औरंगजेब की दक्षिण नीति :

दक्कन मैं निरंतर युद्ध को जारी रखने की औरंगजेब की गलत नीति मुगल साम्राज्य के लिए घातक सिद्ध हुई। यह युद्ध 27 साल तक जारी रहता था उससे साम्राज्य संसाधनों को भारी क्षति पहुंची।

1.2.8 बाह्य आक्रमण और यूरोपीय आगमन:

1739 में नादिरशाह के आक्रमण ने मरणासन्न मुगल साम्राज्य को बहुत आघात पहुंचाया। राजकोष हो गया और सैनिक दुर्बलता स्पष्ट हो गई जो लोग मुगल नाम से भय खाते थे वे अब सिर उठाने लगे तब तो मुगल सत्ता की खुलकर अवहेलना करने लगे। मुगल सेना दुर्बलता के कार्य 18वीं शताब्दी में भारत में सैनिक सामान्य शाही का बोलबाला हो गया। यूरोपीय कंपनिया सैनिक सामंत बन गई और शीघ्र ही भारतीय रजवाड़ों से व्यापार और सैनिक सत्ता में आगे निकल गई। इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी के क्षेत्रीय लाभ में मुगल साम्राज्य के पुनरुत्थान की सभी संभावनाओं को खत्म कर दिया। अंग्रेजों ने प्लासी की लड़ाई जीती साथी दक्कन और गंगा क्षेत्र में अपने साम्राज्य का विस्तार जारी रखा। समय बीतने के साथ पूरे भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने में सक्षम हो गए और मुगल साम्राज्य के पुनरुत्थान के लिए कोई मौका नहीं छोड़ा।

1.2.9 नई शक्तियों का उत्थान :

पंजाब में सिक्ख, राजपूताना में राजपूत, रुहेला सरदार तथा आगरा एवम मथुरा में जाट अधिक शक्तिशाली हो गए थे। बंगाल, अवध और हैदराबाद ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा पहले ही कर दी थी।

1.3 मुगलों के पतन के क्या परिणाम हुए :

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