पश्चिम भारत और धर्म निरपेक्षता में अंतर

भारतीय संविधान एवं भारतीय राजव्यवस्था राज्य लोक सेवा आयोग

भारत और धर्म निरपेक्षता में अंतर :- भारत की धर्मनिरपेक्षता में 2 समानताएं है –

  1. राज्य की नीति धर्म पर आधारित नहीं होगी।
  2. सभी व्यक्तियों को धार्मिक मामलों में स्वतंत्रता प्राप्त होगी।

लेकिन पश्चिम की धर्म निरपेक्षता धर्म को प्रोत्साहन प्रदान नहीं करती है जबकि भारत की धर्म निरपेक्षता धर्म को प्रोत्साहित भी करती है इसलिए राधाकृष्णन ने कहा है कि पश्चिम का धर्म तटस्थ है जबकि भारत का धर्मं पक्षपात रहित है।

भारत के मूल संविधान कि उद्देश्यिका में पंथ निरपेक्षता शब्द का उल्लेख नहीं था। इसे 42 वे संविधान संसोधन अधिनियम 1976 द्वारा संविधान कि उद्देश्यिका में समाविष्ट किया गया।

* NOTE :- सरदार स्वर्ण सिंह कमेटी की सिफारिश पर उद्देश्यिका में 3 नयी अवधारणाएं समाजवादी, पंथ निरपेक्ष तथा अखंडता को समाविष्ट किया गया जबकि 4 शब्द जोड़े गए (और) |

1976 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा था की भारत के संविधान में पंथ निरपेक्षता शब्द का स्पष्ट तौर पर उल्लेख नहीं है लेकिन मूल अधिकार के अंतर्गत अनुच्छेद 25-28 के बीच में धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार भारत को धर्म निरपेक्ष राज्य निर्मित करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए तथा स्वर्ण सिंह कमेटी को आधार बनाकर उद्देश्यिका में पंथ निरपेक्षता को शामिल किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *