बनाना

भारतीय संविधान एवं भारतीय राजव्यवस्था

सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न :- कोई भी देश जो अपने आंतरिक और बाह्य मामलों में बिना किसी बाहरी दवाब के निर्णय लेने में सक्षम है।

यद्द्पि की भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ तथापि वह 26 जनवरी 1950 को सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न बना। इस बीच भारत की स्थिति एक डोमिनियन स्टेट की थी।

Note :- डोमिनियन स्टेट से आशय किसी सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न शक्ति के अधीन रहते हुए स्वायत्त रूप से शासन करने से है।

समाजवादी :- समाजवाद जितना प्रचलित शब्द है उसके अर्थ को लेकर उतना ही विरोधाभास है तथापि समाजवाद के अंतर्गत निम्नलिखित को रखा जा सकता है।

  1. उत्पादन के साधनो पर समाज,राज्य या समूह का सामूहिक नियंत्रण
  2. सामाजिक आर्थिक विषमता को काम करना
  3. समाज के कमजोर वर्गों के हितो की रक्षा करना तथा उनकी सामाजिक, आर्थिक स्थिति को ऊँचा उठाने के लिए प्रयास करना।

भारत का समाजवाद और मार्क्सवादी समाजवाद दोनों में अंतर है। यह अंतर असमाजवाद को स्थापित करने की प्रक्रिया को लेकर है।

मार्क्सवादी समाजवाद जहाँ सामाजिक सामाजिक आर्थिक समता के लिए हिंसा पर बल देता है तथा निजी संपत्ति के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है। वंही भारत का समाजवाद गांधीवादी-लोकतान्त्रिक या फेबियनवादी हैं जो क्रमिक सामाजिक, आर्थिक सुधारों के माध्यम से सामाजिक समता लाने पर बल देता है और ऐसे समाजवाद में निजी संपत्ति का भी सह अस्तित्व पाया जाता है।

यद्द्पि की भारत प्रारम्भ से ही समाजवादी था तथापि 42 वे संविधान संसोधन अधिनियम 1976 द्वारा संविधान की उद्देश्यिका में समाजवादी शब्द को समाविष्ट किया गया।

2008 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गयी जिसमे कहा गया की LPG के इस दौर में समाजवाद को हमारे संविधान की उद्देश्यिका से हटा देना चाहिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय लिया की समाजवाद को संकीर्णन अर्थों में नहीं देखा जाना चाहिए। अभी भी अनेक संवैधानिक प्रावधान ( राज्य के नीति निर्देशक तत्व) तथा सर्कार की नीतियां व कार्यक्रम समाजवाद से ही प्रेरित है जैसे – जन वितरण प्रणाली। अतः अभी भी हमारे लिए समाजवाद प्रासंगिक है।

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