1.3 मिश्रित अर्थव्यवस्था

Indian economy भारतीय अर्थव्यवस्था राज्य लोक सेवा आयोग संघ लोक सेवा आयोग
  1. मिश्रित अर्थव्यवस्था न तो शुद्ध रूप से पूंजीवाद है और न ही शुद्ध रूप से समाजवाद है ; अपितु यह दोनो का मिश्रित रूप है। इस अर्थव्यवस्था में निजी उद्यमों और सार्वजनिक दोनो प्रकार के उद्यमों द्वारा संचालित होती है। इस अर्थव्यवस्था में निजी उद्यमों को मूल्य तंत्र के माध्यम से स्वतंत्र और अनियंत्रित रूप से कार्य करने की अनुमति प्राप्त नहीं होती है। दूसरी ओर, सरकार द्वारा कई तरीकों से निजी उद्यम को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए हस्तक्षेप किया जाता है। इसका कारण यह है कि विभिन्न उदाहरणों से यह सिद्ध हुआ है कि निजी उद्यमों की मुक्त कार्यपद्धति के परिणामस्वरूप अनेक दुष्परिणाम होते हैं। यथा, इसके द्वारा व्यापार चक्रों का निर्माण होता है अर्थात अर्थव्यवस्था में कभी मंदी एवम बेरोजगारी तथा कभी बूम (आर्थिक क्रियाओं में तेजी) एवम मुद्रास्फीति की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके अतिरिक्त, निजी उद्यमों की मुक्त कार्यपद्धति के कारण आय एवम संपत्ति में अत्यधिक असमानताएं उत्पन्न होती हैं। साथ ही यह भी अनुभव किया गया है कि भारत जैसे देशों में, सरकार की सक्रिय सहायता एवम दिशा निर्देश के बिना वांछित वृद्धि दर पर आर्थिक विकास प्राप्त नहीं किया जा सकता है। अतः ऐसे देशों में विशुद्ध पूंजीवाद से होने वाली हानियों को कम करने तथा आर्थिक विकास को तीव्र करने के लिए सरकार द्वारा आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया जाता है।
  2. भारतीय अर्थव्यवस्था में, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनो क्रियाशील है। हालांकि 1991 से भारत में आर्थिक सुधारों के प्रारंभ होने के बाद से, सार्वजनिक क्षेत्र की भागदारी क्रमिक रूप से कम हो रही है। भारत में विभिन्न अर्थव्यवस्था की नीव 1948 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव द्वारा रखी गई थी। इसे आगे चलकर 1956 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव द्वारा संशोधित किया गया। इन प्रस्तावों के अनुसार, विभिन्न उद्योगों को दो क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया था – निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र। आधारभूत, भारी और सामरिक उद्योगों के विकास का उत्तरदायित्व राज्य को जबकि शेष सभी उद्योगों के विकास का दायित्व निजी क्षेत्र को सौंपा गया। यहां तक कि इनके माध्यम से निजी क्षेत्र को भी प्रत्यक्ष नियंत्रण में लाने या उचित वित्तीय एवम मौद्रिक नीतियों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा नियंत्रित और प्रभावित किए जाने की मांग की गई।

1.3.1 मिश्रित अर्थव्यवस्था की सामान्य विशेषताएं

  1. सार्वजनिक एवम निजी क्षेत्र जा सह-अस्तित्व
  2. मूल्य प्रणाली एवम सरकारी निर्देशों की भूमिका
  3. सरकार द्वारा विनियमन एवम निजी क्षेत्र का नियंत्रण
  4. उपभोक्ता की संप्रभुता का संरक्षण
  5. सरकार द्वारा श्रमिकों का संरक्षण
  6. आर्थिक आसमानताओं में कमी
  7. एकाधिकार पर नियंत्रण

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