मराठा साम्राज्य

Medieval history इतिहास राज्य लोक सेवा आयोग संघ लोक सेवा आयोग
  • मुगल साम्राज्य के विरोध स्वरूप उत्पन्न अन्य सभी शक्तियों की तरह, मराठों का भी मुगल साम्राज्य द्वारा किए गए दमन तथा 27 वर्षों के युद्ध का इतिहास रहा है। यह 1681 में औरंगजेब के नेतृत्व में मुगलों द्वारा मराठा साम्राज्य पर आक्रमण के साथ प्रारंभ हुआ।
  • जब औरंगजेब की चालीस साल के असफल दक्कन युद्ध के बाद मृत्यु हुई उस समय तक मराठा अधीनस्थ राज्य ही था।
  • यद्यपि मराठा साम्राज्य निश्चित रूप से कमजोर हो रहा था, किंतु हम सतारा में शाहू तथा कोल्हापुर में स्थित उनकी ताई ताराबाई के मध्य गृह युद्ध के कारण यह प्रक्रिया और अधिक तीव्र हो गई ताराबाई 1700 ईसवी के बाद अपने पुत्र शिवाजी द्वितीय के नाम से मुगल संघर्ष को आगे बढ़ा रहे थीं।
  • ताराबाई गुट के साथ टकराव का समाधान आगे चलकर, 1731 में वारना की संधि में हुआ जिसमें कोल्हापुर राज्य शिवाजी द्वितीय को दे दिया गया। इस तरह मराठा गृह युद्ध का तो समापन हुआ पर राज्य का नियंत्रण धीरे-धीरे शिवाजी के वंश से हटकर पेशवाओं के हाथों में चला गया ।
  • 1719 में सैयद बंधुओं द्वारा दिल्ली में कठपुतली सम्राट बनाने में सहायता करके, पेशवा (प्रधानमंत्री) बालाजी विश्वनाथ ने अपने महराज के लिए एक मुगल सनद (शाही आदेश) प्राप्त किया इसके तहत साहू को दक्कन के छह मुगल सुबों में चौथ सरदेशमुखी (सरकारी राजस्व का क्रम एक चौथाई और दसवे भाग और मालवा एवं गुजरात से चौथ तथा महाराष्ट्र की स्वतंत्र स्थिति बनाए रखने के अधिकार प्राप्त हो गए।
  • मराठा गृह युद्ध समाप्त होने के बाद राज्य का नियंत्रण धीरे-धीरे शिवाजी के वंशज से पेशवाओं के हाथों में आ गया। 1720 में बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु के बाद उनके 20 वर्षीय पुत्र बाजीराव प्रथम पेशवा बने।
  • मराठों ने स्थानीय जमींदारों को सलाना नजराना देने की परंपरा को परिवर्तित करने की कोशिश नहीं की।
  • बाजीराव की मृत्यु के बाद उनके पुत्र बालाजी बाजीराव जिन्हें नाना साहब के रूप में भी जाना जाता था, को उनकी जगह नियुक्त किया गया।
  • पानीपत के तृतीय युद्ध में सदाशिव राव भाऊ के नेतृत्व में मराठा सेना अहमद शाह अब्दाली से बुरी तरह पराजित हुई यह मराठा प्रभुत्व में गिरावट की शुरुआत थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *