ज्ञान अर्थव्यवस्था

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डिजिटल क्रांति में मनुष्य के लिए अवसरों के नए द्वार खोल दिए हैं जिसकी बदौलत ज्ञान अर्थव्यवस्था के तहत व्यक्ति समृद्धि और धन उपार्जन कर सकता है। नई तकनीक ने दुनिया भर में ज्ञान क्रांति के जरिए अंतर निर्भरता का बोध बढ़ाया है जिससे भूमंडलीय अंतर संवाद व्यापक सघन त्वरित तथा प्रभावी हुआ है। विश्व बैंक रिपोर्ट 1999 की शुरुआत ही साथ आत्मबोध से होती है आवश्यक निर्माण केवल भौतिक कौन सी और मानव कौन सा लिख अच्छा कर लेने भर्ती नहीं होता बस सूचनाओं के एकत्रीकरण स्थायीकरण की बुनियाद पर होता है।

प्रौद्योगिकी विकास कि केंद्रीय वस्तु ज्ञान है। विकास की शुरुआत करने और उसकी निरंतरता बनाए रखने के लिए तकनीकी ज्ञान, गुणवत्ता का ज्ञान, विषय वस्तु का ज्ञान, अधिगम हासिल करने के तरीके का ज्ञान तथा इसके सदुपयोग का ज्ञान है जैसे विभिन्न रूपों के ज्ञान को समन्वित करना होगा लेकिन ज्ञान निरपेक्ष नहीं होता। इसकी संरचना समाज सापेक्ष होती है जिसमें प्रायः निर्धन और महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान की उपेक्षा कर दी जाती है सभ्यता के इतिहास में मुख्य रूप से चार प्रकार की अर्थव्यवस्था की पहचान की गई है। आदिकालीन अर्थव्यवस्था में आजीविका का एकमात्र साधन स्वीकार था इसके उपरांत कृषि अर्थव्यवस्था आई। आदिकालीन अर्थव्यवस्था से कृषि अर्थव्यवस्था में आने में हमें कुछ हजार वर्ष लगे अगले चरण में औद्योगिक अर्थव्यवस्था का अभ्युदय हुआ कृषि अर्थव्यवस्था से औद्योगिक अर्थव्यवस्था में परिवर्तन में महज 200 वर्ष लगे चौथे चरण के रूप में क्रांति और इंटरनेट ने ज्ञान और सूचना को जन्म दिया ज्ञान अर्थव्यवस्था का सर्वाधिक उल्लेखनीय गुड्स की गति है इसके विकास में मात्र 25 वर्ष लगे।

डॉ. पाल झूमर ने सन 1950 में नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर रॉबर्ट सोलो के सिद्धांत का विकास करते हुए विकास का नया सिद्धांत प्रस्तुत किया उनके अनुसार आर्थिक प्रणाली जिस प्रौद्योगिकी और ज्ञान पर आधारित होती है उसका अभिन्न अंग होता है आर्थिक विकास को गति मिलती है दूसरे शब्दों में है जिसमें ज्ञानार्जन और उसके उपयोग की प्रमुख भूमिका होती है।

ज्ञान अर्थव्यवस्था अन्य अर्थव्यवस्थाओं से उल्लेखनीय रूप से भिन्न होती है इसमें रोजगार का स्त्रोत कृषि अथवा वस्तु उत्पादन ना होकर सेवाएं होती है फलता इस अवस्था की नई वस्तु कुशल और शिक्षित मानव संसाधन है मानव संसाधन में केवल औपचारिक शिक्षा प्राप्त लोग ही नहीं होते लिखित ज्ञान अर्थात अनुभव से हासिल ज्ञान के द्वारा विशेषज्ञता अर्जित करने वाले लोग भी शामिल होते हैं यह अवस्था इस अलखित ज्ञान पर बल देती है क्योंकि संस्थान की तरह भी यह महत्वपूर्ण होती है ।

ज्ञान अर्थव्यवस्था की आर्थिक और सामाजिक संगठन सूचना के इर्द-गिर्द घूमते हैं यहां क्योंकि सूचना ही कच्चा माल है इसलिए ज्ञान संस्था के स्वरूप निर्धारण में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है ज्ञान अर्थव्यवस्था के अंतर्गत इंदु प्रौद्योगिकी में मौजूद उत्पादन बढ़ाने की संभावना निहित होती है।

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