संविधान के स्त्रोत का परिचय

Indian constitution भारतीय संविधान एवं भारतीय राजव्यवस्था राज्य लोक सेवा आयोग संघ लोक सेवा आयोग

प्रस्तावना बताती है कि संविधान के स्त्रोत भारत के लोग अर्थात भारत की जनता है। प्रस्तावना की शुरुआत में ही प्रयुक्त वाक्यांश ‘हम भारत के लोग’ इस प्रयोजन की पूर्ति करता हैं यह वाक्यांश भारतीय राजव्यवस्था के लोकतांत्रिक पक्ष को भी प्रस्तुत करता है।

ध्यातव्य है कि इस बात पर कुछ विवाद है कि क्या सचमुच हमारे संविधान का स्रोत भारत की जनता ही है ? कुछ लोग इसके विरोध में कहते हैं कि क्योंकि संविधान सभा के सदस्यों का चयन जनता द्वारा वयस्क मताधिकार के माध्यम से नहीं हुआ था इसलिए ‘हम भारत के लोग’ वाक्यांश अपने अर्थ को ना ही न्यायोचित तरीके से सिद्ध नहीं कर पाता है। संविधान सभा तो ब्रिटिश संसद के एक अधिनियम द्वारा निर्मित हुई थी इसलिए इसे लोक समर्थन हासिल नहीं था।

वस्तुतः मतभेद व्यवहारिक रूप से निरर्थक है। पहली बात तो यह है की प्रस्तावना को संविधान निर्माण की प्रक्रिया के अंत में स्वीकार किया गया था और उस समय तक भारत अंग्रेजों से स्वतंत्र हो जाने के कारण ब्रिटिश संसद के किसी भी अधिकार या नियंत्रण से मुक्त हो चुका था। दूसरे चाहे संविधान सभा का चयन व्यस्त मताधिकार से ना हुआ हो वास्तविकता यही है कि स्वाधीनता आंदोलन के सभी महत्वपूर्ण नेता इसमें शामिल थे और यदि चुनाव होता है अभी तो जनता प्रायः उन्हे ही चुनती। तीसरे संविधान के निर्माण के बाद व्यवहारिक तौर पर यह स्पष्ट हो चुका है कि भारतीय राज्य में संप्रभुता की वास्तविक हकदार जनता ही है वर्तमान में इस वाक्यांश को गलत नहीं ठहराया जा सकता।

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