अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)

राज्य लोक सेवा आयोग संघ लोक सेवा आयोग
  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization- ILO) संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है जिसका अधिदेश अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानकों को निर्धारित कर सामाजिक न्याय तथा सभ्य कार्यों को बढ़ावा देना है।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानकों का निर्धारण करता है, कार्यस्थल पर अधिकारों को बढ़ावा देता है। यह सभ्य रोज़गार अवसरों, सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही कार्य से संबंधित मुद्दों पर सुदृढ़ संवाद को प्रोत्साहित करता है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र की एकमात्र त्रिपक्षीय संस्था है जिसकी स्थापना वर्ष 1919 में वर्साय की संधि द्वारा राष्ट्र संघ की एक संबद्ध एजेंसी के रूप में की गई थी।
  • उद्योगों में कार्य के घंटे, बेरोज़गारी, मातृत्व सुरक्षा, महिलाओं के लिये रात्रिकालीन कार्य, न्यूनतम आयु और उद्योगों में युवा व्यक्तियों के लिये रात्रिकालीन कार्य से संबंधित 9 अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलनों एवं 10 सिफारिशों को दो वर्ष से कम समय (वर्ष 1922 तक) में अपनाया गया था।
  • संयुक्त राष्ट्र समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने से वर्ष 1946 में ILO संयुक्त राष्ट्र की प्रथम विशिष्ट एजेंसी बन गई।
  • श्रमिकों को सभ्य कार्य एवं न्याय हेतु कार्य करने के लिये संगठन को वर्ष 1969 में इसकी 50वीं वर्षगाँठ पर नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • वर्ष 1980 में ILO ने सॉलिडैरिटी संगठन की वैधता को कन्वेंशन संख्या 87 जिसे पोलैंड ने वर्ष 1957 में अनुमोदित किया था, के आधार पर पूर्ण समर्थन देकर पोलैंड को तानाशाही से मुक्ति दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
  • यह इस बात पर बल देता है कि कार्य का भविष्य पूर्व निर्धारित नहीं है, सभी के लिये सभ्य कार्य (Decent work) संभव है, लेकिन समाज को इसके लिये कार्य करना होगा। ILO ने वर्ष 2019 में अपनी स्थापना की शताब्दी के अवसर पर इसकी पहल के हिस्से के रूप में भविष्य के कार्य पर वैश्विक आयोग की स्थापना की।
  • इसका काम भविष्य के कार्यों की गहराई से जाँच करना है ताकि 21वीं सदी में सामाजिक न्याय के वितरण के लिये विश्लेषणात्मक आधार प्रदान किया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *