ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में भारत

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उदीयमान ज्ञान अर्थव्यवस्था में भारत को बड़ी संख्या में उच्च क्षमता युक्त मानव संसाधन की आवश्यकता होगी हमारी सबसे बड़ी ताकत उस स्त्री कौशल की उपलब्धता है सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमें कक्षा आधिकारिक स्वीकृति हासिल हो रही है भारत में प्रतिस्पर्धी यों को पकड़ने में सफल रहे लेकिन इस स्थिति को बनाए रखने तथा इसे अधिक व्यापक बनाने के लिए जरूरी है कि हम और अधिक योग्यता प्राप्त व्यक्ति अधिकाधिक संख्या में तैयार करें।

भारत एक युवा देश है जिसकी आबादी का बहुलक युवक हैं अनुमानों से संकेत मिलता है कि आगामी कुछ दशकों में कामकाजी लोगों की संख्या और अनुपात बना रहेगा इसके विपरीत सभी विकसित राष्ट्रों के साथ-साथ चीन में भी कामकाजी लोगों की भारी कमी हो जाएगी भारत में जहां 2020 में चार करोड़ 70 लाख कामकाजी लोग अतिरिक्त होंगे वही अकेले अमेरिका में 1.70 करोड़ लोगों की कमी होगी जनसांख्यिकी प्रवृत्तियों का लाभ हासिल करने के लिए हमें कुछ और शिक्षित लोगों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।

भारत को ज्ञान सृजन मानव पूंजी का विकास सामाजिक पूंजी अधिगम प्रणाली तथा तंत्र को बढ़ाते रहना होगा ताकि वह अपनी नवाचारी क्षमता को भी बढ़ावा दे सके विज्ञान और प्रौद्योगिकी को नवीन ज्ञान सृजित करना होगा मानव विकास का नेटवर्क क्षमता वर्धन में मदद करनी होगी और उद्यमी संस्कृति को गतिशील बनाना होगा; जिससे भारत भूमंडली ज्ञान युग का पूर्ण भागीदारी बन सकेे। देश के ज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षमता का विस्तार करने के लिए सरकार को समुचित रणनीति तैयार करना चाहिए हमें नवीन तथा उन्नत उत्पादों प्रक्रियाओं प्रणालियों और सेवाओं के निर्माण व मूल्यवर्धन में ज्ञान के योगदान को बढ़ाना होगा ताकि भारतीय उद्यमों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाई जा सके मूल्यवर्धन नवाचार और उत्पादकता के देश भर में प्रसार के लिए नवीन ज्ञान और प्रौद्योगिकी परिवर्तन को गति देना जरूरी हो जाता है इससे आरती प्रतिस्पर्धी क्षमता में ज्ञान का योगदान प्रकट होता है साथ ही प्रमुख क्षेत्रों के लिए सरकारी निवेश को प्राप्त होती है कि किसी को स्थानापन्न किए बगैर अथवा दूसरों द्वारा निवेशकों साहित्य बगैर इससे एक विशेष समय अवधि में व्यापक सुधार करना चाहिए।

भारत एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की कगार पर खड़ा है नवीन ज्ञान और प्रौद्योगिकी हमारे समस्त कार्यों निर्माण हुआ राय के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है ज्ञान दूसरे संसाधनों से भिन्न होता है क्योंकि प्रत्येक नई खोज अगली खोज का मंच तैयार करते हैं अतः हमारी भाभी समृद्धि और ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में विकास के लिए ज्ञान के उपयोग के एक समयबद्ध कार्यक्रम की तत्काल आवश्यकता है।

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