(Situational Ethics)परिस्थितिजन्य नैतिकता

नीतिशास्त्र

कई बार ऐसे कर्म जो सामाजिक मानदंडों के विरुद्ध होते हैं परंतु व्यक्ति परिस्थितिवश ऐसा करने पर मजबूर हो जाता है तब परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नैतिक कर्म का मूल्यांकन किया जाता है, इसे परिस्थितिजन्य नैतिकता कहते है।

इस प्रकार नैतिकता नैतिक कर्मों के निर्धारक तत्व के रूप में intention और परिणाम दोनो के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।

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