2 परिणामवादियों के अनुसार :

नीतिशास्त्र

परिमानवादियों का मानना है कि इरादा कुछ भी हो यदि परिणाम अच्छा नहीं है तो कर्म नैतिक नही माना जायेगा

यदि उपरोक्त दोनों निर्धारकों पर गौर किया जाए तो दोनों में से कोई भी पूर्ण नहीं है। कई बार व्यक्ति का इरादा नेक होता है , परन्तु उसका परिणाम भी अच्छा होता है किन्तु उसके इरादे की नेक नीयती में यदि संकीर्णता हो तो वह कर्म नैतिकता के दायरे में लाया जाना एक द्वंद का प्रश्न हो जाता है। जैसे : मदर इंडिया फिल्म में नायिका राधा अपने दोनो भूखे बच्चों की भूख को मिटाने के लिए वह साहूकार लाला के यहां चोरी करती है। तब प्रश्न यह उठ जाता है कि एक तरफ जहां उसका intention पवित्र है परन्तु उसके द्वारा किया गया कार्य सामाजिक मानदंडों के विपरीत है। अतः ऐसी स्थिति में उसका कर्म नैतिकता और अनैतिकता के बीच एक द्वंद का प्रश्न उत्पन्न कर देता है।

यदि उपरोक्त दोनों निर्धारकों पर गौर किया जाए तो दोनों में से कोई भी पूर्ण नहीं है। कई बार व्यक्ति का इरादा नेक होता है , परन्तु उसका परिणाम भी अच्छा होता है किन्तु उसके इरादे की नेक नीयती में यदि संकीर्णता हो तो वह कर्म नैतिकता के दायरे में लाया जाना एक द्वंद का प्रश्न हो जाता है। जैसे : मदर इंडिया फिल्म में नायिका राधा अपने दोनो भूखे बच्चों की भूख को मिटाने के लिए वह साहूकार लाला के यहां चोरी करती है। तब प्रश्न यह उठ जाता है कि एक तरफ जहां उसका intention पवित्र है परन्तु उसके द्वारा किया गया कार्य सामाजिक मानदंडों के विपरीत है। अतः ऐसी स्थिति में उसका कर्म नैतिकता और अनैतिकता के बीच एक द्वंद का प्रश्न उत्पन्न कर देता है।

ठीक इसके विपरीत यदि कोई परीक्षार्थी समर्पण के भाव से मेहनत करता है और परीक्षा में उसका परिणाम सकारात्मक नहीं रहता है तो क्या परिणामवाद के अनुसार उसका कर्म अनैतिक कहा जाना चाहिए। दोनों निर्धारकों के इस द्वंद की स्थिति में इरादा आधारित निर्धारक तत्वों को अधिक महत्व दिया गया है परन्तु इसका तात्पर्य यह नही है की व्यक्ति अच्छे परिणाम की चेष्टा नही करेगा। इरादा आधारित निर्णय में सबसे बड़ी सीमा यह है की इरादे को प्रत्यक्ष तथ्यों के माध्यम से प्रभावित नहीं किया जा सकता। इस द्वंद को यदि समकालीन स्थिति में देखने का प्रयास किया जाए तो हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री का सभी सिविल सेवकों के लिए संदेश था की वह जहां तक हो सके समर्पण के साथ अच्छे इरादे को लेकर नवाचार उन्मुख प्रयास करें। यदि परिणाम अच्छा होता है तो भी सही है और यदि परिणाम में समस्या आती है तो उसे और बेहतर करने की परिस्थितियों पर सरकार विचार करेगी।

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