3.2 श्रम की असीमित आपूर्ति के साथ आर्थिक विकास का लुइस मॉडल

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  1. लुइस ने श्रम की असीमित आपूर्ति के उपयोग के माध्यम से आर्थिक विकास का एक सिद्धांत प्रस्तुत किया। अल्प विकसित देशों में सामान्यतः निर्वाह वेतन पर श्रम की असीमित आपूर्ति उपलब्ध होती है। श्रम की यह असीमित आपूर्ति अधिशेष कृषि श्रम, अनौपचारिक श्रम, घरेलू नौकर, परिवारों में महिलाओं आदि के रूप में होती है। लुइस मॉडल प्रच्छन्न बेरोजगारी पर नही बल्कि अन्य स्थितियों पर आधारित है, यथा
  1. अपने मॉडल में लुइस पूंजीवादी (विनिर्माण, खनन आदि) क्षेत्र और ‘निर्वाह क्षेत्र’ या स्व-रोजगार क्षेत्र से निर्मित दोहरी अर्थव्यवस्था में अंतर-क्षेत्रीय (इंटर-सेक्ट्रोल) संबंधों के संदर्भ में आर्थिक विकास की प्रक्रिया का विश्लेषण करते है। अधिक जनसंख्या वाले देशों में पूंजीवादी क्षेत्र निर्वाह क्षेत्र (जिसमे श्रम की लगभग असीमित आपूर्ति होती है) से श्रम को अपनी ओर आकर्षित करता है। पूंजीवादी क्षेत्र का वेतन, निर्वाह क्षेत्र में श्रमिकों की प्राप्ति/आय पर निर्भर करता है। यह वेतन निर्वाह क्षेत्र की तुलना में थोड़ा अधिक होता है जिसके कारण यह श्रम को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस प्रकार इस मजदूरी पर, पूंजीवादी क्षेत्र को उसकी आवश्यकता के अनुरूप श्रम की निर्बाध आपूर्ति प्राप्त हो जाती है। निर्वाह वेतन, जीवन निर्वाह के लिए न्यूनतम आवश्यकता को ध्यान में रख कर पारिश्रमिक तय करने वाले पारंपरिक दृष्टिकोण द्वारा या निर्वाह कृषि में प्रति श्रमिक औसत उत्पाद के दृष्टिकोण द्वारा नियंत्रित होता है।
  2. लुइस के अनुसार, आर्थिक विकास की प्रक्रिया us स्थिति में समाप्त हो जानी चाहिए, जब :

i) कोई अधिशेष श्रम उपलब्ध न हो

ii) जनसंख्या में गिरावट आए

iii) खाद्य कीमतों में वृद्धि मजदूरी को बढ़ावा दे ; तथा

iv) अधिक मजदूरी के लिए श्रमिकों द्वारा दवाब डाला जाए।

3.2.1 टी

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