आर्थिक विकास (Economic-Development)

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आर्थिक विकास एक व्यक्तिनिष्ठ या आत्मनिष्ठ संकल्पना है जिसमे राष्ट्रीय आय एवम उत्पादन पर ही बल न देकर समग्र मानवीय विकास पर बल दिया जाता है। दरअसल विकास का अर्थ सकारात्मक परिवर्तन से है और इसके अंतर्गत सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, गुणात्मक एवम परिणात्मक सभी प्रकार के परिवर्तन सम्मिलित होते हैं। जहां आर्थिक परिवर्तन से तात्पर्य यह है कि आय में बढ़ोतरी हो जिससे हमारी क्रय शक्ति क्षमता बड़े तथा हमारे जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार हो, वहीं सामाजिक सांस्कृतिक परिवर्तन हमारे सकारात्मक रुझान एवम आंतरिक खुशी से जुड़े है जो हमे गुणवत्तापूर्ण, गरिमामय एवम विविधता से परिपूर्ण जीवन जीने की संभावना से युक्त बनाते है। अतः उत्पादन अथवा संवृधि का बढ़ना विकास का मात्र एक पक्ष है जबकि मानव विकास के लिए यह आवश्यक है कि सकारात्मक सांस्कृतिक परिवर्तनों के साथ साथ अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रकों में समावेशी उत्थान भी हो जिससे व्यक्ति का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके। इसके लिए राज्य का यह उत्तरदायित्व है कि वह व्यक्ति को गुणवत्ता से युक्त बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाए और अपनी कल्याणकारी भूमिका से आगे बढ़ कर उनके क्षमता निर्माण में सक्रिय योगदान करे। इसके लिए आवश्यक है कि मूलभूत सुविधाओं के रूप में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छ पेयजल, खाद्यानों की उपलब्धता एवम बेहतर पर्यावरणीय दशाएं उपलब्ध हो और साथ ही सुसाशन एवम निर्देशित नव लोक प्रबंधन द्वारा सामाजिक विकास कार्यक्रमों के प्रभावों को और लक्षित बनाया जाए। नोवेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री प्रो. अमर्त्य सेन आर्थिक विकास को अधिकारिता (Entitlement) तथा क्षमता (Capabilities) के विस्तार के रूप में परिभाषित करते है।

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