नैतिक मूल्य आत्मनिष्ठ है या वस्तुनिष्ठ

वस्तुनिष्ठता (Objectivity) से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है जिसके संबंध में सर्वसम्मति रहती है। वहां कोई मतभिन्नता नहीं होती। पूर्ण वस्तुनिष्ठता की स्थिति हम ‘शुद्ध गणित’ (Pure mathematics) और ‘शुद्ध तर्कशास्त्र’ (Pure logic) में पाते हैं। वहीं, आत्मनिष्ठता (Subjectivity) की स्थिति में मतभिन्नता स्वाभाविक तौर पर पाई जाती है। अब यदि हम नैतिक मूल्यों की […]

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मूल्यों के प्रकार

मानवीय मूल्यों को प्रमुखता दो भागो में बांटा जा सकता है – उद्देश्य की दृष्टि से : इस दृष्टि से मानव मूल्य ‘ साध्य ‘ और ‘ साधन ‘ दो उपवर्गों में विभाजित होते हैं। साध्य मूल्य वे मूल्य है जिन्हे हम पाना चाहते है। जैसे शांति, संतोष, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, ज्ञान आदि। साधन मूल्य […]

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नीतिशास्त्र और मानवीय सह-सम्बन्ध (ETHICS AND HUMAN INTERFACE)

मानव मूल्य (Human Value) : ‘मानव मूल्य’ में जिस शब्द को समझने की जरुरत है वह है – ‘मूल्य’ । सामान्य शब्दों में हम कह सकते है, जिसका जितना महत्व है उसका उतना मूल्य है। मूल्य की व्याख्या विभिन्न क्षेत्रों में अपने अपने तरीके से होती है। जैसे, अर्थव्यवस्था में जिसकी जितनी मांग है उसका […]

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सत्यनिष्ठा और भ्रष्टाचार : 2

वर्तमान समय में आधुनिकता का संदर्भ नकारात्मक होता जा रहा है। सामाजिक पहचान आर्थिक संवृद्धि और संप्रभुता हो गई है। समाज में लोग आने वाली भावी पीढ़ियों को तकनीक और व्यवसायिक सक्षमता प्रदान करना चाहते है। परंतु चारित्रिक मूल्यों में ह्रास के कारण थोड़ी सी विपरीत परिस्थिति में भावी पीढ़ी अपनी आकांक्षाओं को पूर्ण करने […]

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सत्यनिष्ठा और भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार एक चुनौती के रूप में सत्यनिष्ठा के ह्रास का एक प्रमुख कारण है। भ्रष्टाचार सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक समस्या से भी आगे बढ़कर एक मनोवृतिक और नैतिक समस्या है। व्यवस्थागत स्तर भ्रष्टाचार वह चुनौती है। जहां व्यक्ति अपने निजी हितों और स्वार्थ के कारण सार्वजनिक मूल्यों और नैतिकता के साथ समझौता करता है और व्यवस्था […]

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भागीदारी आधारित शासन

भागीदारी आधारित शासन के इस दौर में सरकार निजी क्षेत्र और नागरिक समाज तीनों एक साथ मिलकर कार्य कर रहे है। आज सेवाओं का संपादन लोक-निजी-नागरिक भागीदारी के आधार पर हो रहा है। शासन में EEE बनाए रखने के लिए सिविल सेवकों से यह अपेक्षा की जाती है कि अपने स्वविवेक के आधार पर निर्णय […]

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सत्यनिष्ठा और सिविल सेवकों के स्वविवेक के निर्णय में संबंध

CSCC 1964 के अनुसार एक लोकसेवक/ सिविलसेवक को हमेशा व्यक्तित्व के स्तर पर सत्यनिष्ठा के मूल्य को धारण करना चाहिए। आचरण संहिता का मानना है कि एक सिविल सेवक को जो की संस्था के उच्च स्तर पर कार्य कर रहा होता है। स्वविवेक के आधार पर निर्णय लेते समय व्यक्ति अपने अंतः प्रज्ञा (Intution) के […]

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सहिष्णुता और UNESCO

सामान्यतः बोलचाल की भाषा में सहिष्णुता शब्द का प्रयोग धार्मिक मतांतर और विरोधाभास की स्थिति में सामंजस्य स्थापित करने के लिए किया जाता रहा है। परंतु सहिष्णुता इसमें भी कुछ अधिक है। UNESCO के अनुसार (सहिष्णुता के सिद्धांत पर घोषणापत्र 1995) सहिष्णुता वैश्विक परिप्रेक्ष्य में निम्न रूप से परिभाषित की जा सकती है – सहिष्णुता […]

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समानुभूति शून्यता क्या है ? ( According to world Bank) : Epathy Deficit

समानुभूति व्यक्तित्व का वह आयाम है जहाँ व्यक्ति सर्वप्रथम अपनी भावनाओं के प्रति जागृत होता है तत्पश्चात इस भावनात्मक जागरूकता के आधार पर दूसरे की पीड़ा को महसूस करने का प्रयास करता है।विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान वैश्विक समाज में समानुभूतिक शून्यता की स्थिति व्याप्त है। कहने का तात्पर्य यह है कि इस […]

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समानुभति और कार्य संस्कृति

इस प्रकार यदि संस्थागत स्तर पर नेतृत्वकर्ता में यदि समानुभूति का गुण है तो वह अपने संस्था के स्तर पर एक अच्छी कार्यसंस्कृति का निर्माण करेगा क्यूंकि प्रायः उच्च स्तर पर निर्णय लेने के दौरान मतभेद और विरोधाभास की स्थिति पाई जाती है। इस दौरान यदि नेतृत्वकर्ता समानुभूति की अवस्था पर रहता है तो वह […]

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