लोकतांत्रिक

इसका अर्थ है कि भारतीय राज्य व्यवस्था शासन के जिस प्रकार को स्वीकार करती है वह लोकतंत्र है, ना कि राजतंत्र, अधिनायकतंत्र या कुछ और। इसका अर्थ है कि भारत का शासन भारत की जनता द्वारा ही चलाया जाता है। जो कि भारत का क्षेत्रफल और जनसंख्या बहुत अधिक है स्वभाविक है क्या प्रत्यक्ष लोकतंत्र […]

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संविधान के स्त्रोत का परिचय

प्रस्तावना बताती है कि संविधान के स्त्रोत भारत के लोग अर्थात भारत की जनता है। प्रस्तावना की शुरुआत में ही प्रयुक्त वाक्यांश ‘हम भारत के लोग’ इस प्रयोजन की पूर्ति करता हैं यह वाक्यांश भारतीय राजव्यवस्था के लोकतांत्रिक पक्ष को भी प्रस्तुत करता है। ध्यातव्य है कि इस बात पर कुछ विवाद है कि क्या […]

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पश्चिम भारत और धर्म निरपेक्षता में अंतर

भारत और धर्म निरपेक्षता में अंतर :- भारत की धर्मनिरपेक्षता में 2 समानताएं है – राज्य की नीति धर्म पर आधारित नहीं होगी। सभी व्यक्तियों को धार्मिक मामलों में स्वतंत्रता प्राप्त होगी। लेकिन पश्चिम की धर्म निरपेक्षता धर्म को प्रोत्साहन प्रदान नहीं करती है जबकि भारत की धर्म निरपेक्षता धर्म को प्रोत्साहित भी करती है […]

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पंथनिरपेक्ष

पंथनिरपेक्षता शब्द को जॉर्ज जैकब होलिओक ने 1851 में दिया था जो ब्रिटेन का धर्मनिरपेक्षतावादी था। पंथनिरपेक्षता की अवधारणा की शुरुआत फ्रांस से होती है। *भारत में सबसे पहले राणिजीत सिंह के पंथनिरपेक्ष राज्य की स्थापना पंजाब में 19 वी सदी के पूर्वार्द्ध में की। धर्म :- i) धर्म विरोधी (चीन)साम्यवादी वामपंथी ii) धर्म तंत्रीय […]

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बनाना

सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न :- कोई भी देश जो अपने आंतरिक और बाह्य मामलों में बिना किसी बाहरी दवाब के निर्णय लेने में सक्षम है। यद्द्पि की भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ तथापि वह 26 जनवरी 1950 को सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न बना। इस बीच भारत की स्थिति एक डोमिनियन स्टेट की थी। Note :- […]

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उद्देश्यिका पाठ्यक्रम

.उद्देश्यिका की पृष्ठ्भूमि उद्देश्यिका का विश्लेषण क्या उद्देश्यिका संविधान का अंग है क्या उद्देश्यिका में संविधान संसोधन संभव है उद्देश्यिका की आलोचना उद्देश्यिका का महत्व 1] .उद्देश्यिका की पृष्ठ्भूमि :- i) उद्देश्यिका की अवधारणा सबसे पहले अमेरिकी संविधान में दिखाई देती है। इसी अमेरिकी संविधान से उद्देश्यिका की अवधारणा को भारत के संविधान में लिया […]

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उद्देश्यिका

हम भारत के लोग भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए;तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक न्याय,विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता;प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए,तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने […]

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भारत का संविधान और भारतीय राजव्यवस्था कक्षा [3]

संविधान व संविधानवाद में संबंध :- जहाँ संविधान है वहां संविधानवाद भी हो सकता है | जहाँ संविधान नहीं है वहां संविधानवाद हो सकता है | जहाँ संविधान है वहां संविधानवाद नहीं हो सकता है | भारत में संविधान और संविधानवाद दोनों है। राज्य :- राज्य एक राजनीतिक इकाई है और राज्य की शक्ति देश […]

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भारत का संविधान और भारतीय राजव्यवस्था कक्षा [2]

संविधान(Constitution):- शाब्दिक अर्थ:- Constitution जो की एक फ्रेंच शब्द है जो लैटिन भाषा के Constitous (स्थापित करना) + ion (विधि) से मिलकर बना है। भावार्थ:- संविधान किसी भी देश का सर्वोच्च विधिक दस्तावेज होता है, जो सरकार के अंगों , कार्यों शक्तियों व उत्तरदायित्वों तथा उसकी सीमाओं के आधारभूत सिद्धांतों का उल्लेख करता है एवम […]

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भारत का संविधान एवं भारतीय राजव्यवस्था : कक्षा [1]

संवैधानिक (constitutional) गैर संवैधानिक (non constitutional) गैर संवैधानिक (Anti constitutional) विधिक संवैधानिक : – ऐसे प्रावधान, अवधारणाएं, संस्थाएं जिनका उल्लेख संविधान में हो उन्हें संवैधानिक कहते है। राष्ट्रपति,संसद , संघ लोक सेवा आयोग, वित्त आयोग इत्यादि गैर संवैधानिक:- ऐसे प्रावधान,विचार, अवधारणाएं, संस्थाएं जिनका उल्लेख संविधान में न हो उन्हें गैरसंवैधानिक कहते है। असंवैधानिक:- ऐसे प्रावधान,विचार, […]

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