नियमवाद और परिणामवाद आधारित निर्णय

किसी भी नैतिक कर्म के निर्धारण के लिए नियम और परिणामवाद का भी सहारा लिया जा सकता है। नियमवादियों का मानना है की यदि व्यक्ति नियमों के अनुसार कर्म कर रहा है भले ही उसका परिणाम या प्रभाव नकारात्मक हो तो वो कर्म नैतिक माना जाएगा। परन्तु ठीक इसके विपरीत यदि भले ही नियम का […]

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(Situational Ethics)परिस्थितिजन्य नैतिकता

कई बार ऐसे कर्म जो सामाजिक मानदंडों के विरुद्ध होते हैं परंतु व्यक्ति परिस्थितिवश ऐसा करने पर मजबूर हो जाता है तब परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नैतिक कर्म का मूल्यांकन किया जाता है, इसे परिस्थितिजन्य नैतिकता कहते है। इस प्रकार नैतिकता नैतिक कर्मों के निर्धारक तत्व के रूप में intention और परिणाम दोनो के […]

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2 परिणामवादियों के अनुसार :

परिमानवादियों का मानना है कि इरादा कुछ भी हो यदि परिणाम अच्छा नहीं है तो कर्म नैतिक नही माना जायेगा यदि उपरोक्त दोनों निर्धारकों पर गौर किया जाए तो दोनों में से कोई भी पूर्ण नहीं है। कई बार व्यक्ति का इरादा नेक होता है , परन्तु उसका परिणाम भी अच्छा होता है किन्तु उसके […]

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1. INTENTION आधारित निर्णय

नैतिकता का निर्धारण व्यक्ति के इरादे को ध्यान में रखकर क्या किया जाता है। यदि व्यक्ति का इरादा पवित्र हो भले ही उसका परिणाम अच्छा हो या बुरा इरादाबादियों के अनुसार नैतिक माना जायेगा। वहीँ भले ही परिणाम शुभ हो लेकिन यदि व्यक्ति का इरादा पवित्र नहीं है तो वह कर्म अनैतिक माना जायेगा। यदि […]

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कुछ प्रमुख सिद्धांत जिनके आधार पर नैतिक कर्मों का निर्धारण किया जाता है

मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्व : मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्व : कुछ प्रमुख सिद्धांत जिसके आधार पर नैतिक कर्मों का निर्धारण किया जाता है – INTENSION(इरादे) के आधार पर 2. CONSEQUENCES (परिणाम) के आधार पर 3. DEONTOLOGY(नियमवाद) के अनुसार 4. TEDIOLOGY(परिणामवाद) के अनुसार 5. PERFECTIONALISM(आत्मपूर्णतावादी दर्शन) के अनुसार 6. साध्य […]

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