क्षेत्रीय शक्तियों का उदय

2.2.2( अवध ) अवध प्रांत पश्चिम में कन्नौज जिले से पूर्व में कर्मनाशा नदी तक विस्तृत था। 1722 शआदत खा को सूबेदार नियुक्त किए जाने के साथ ही अवध लगभग स्वतंत्र हो गया था। वह आराजकता समाप्त करने और बड़े जमींदारों को अनुशासित करने में सफल रहा। उसने एक नई राजस्व व्यवस्था भी लागू की […]

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2. क्षेत्रीय शक्तियों का उदय

2.1 पृष्ठभूमि 1761 तक , मुगल साम्राज्य केवल नाम मात्र के लिए साम्राज्य रह गया था, क्योंकि इसकी कमजोरियों ने स्थानीय शक्तियों को स्वतंत्र होने का अवसर प्रदान किया।फिर भी , मुगल सम्राट की प्रतीकात्मक सत्ता बनी रही, क्योंकि उन्हें अभी भी राजनीतिक वैधता का स्त्रोत माना जाता था। नए राज्यों ने प्रत्यक्ष रुप से […]

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मुगलों के पतन के क्या परिणाम हुए

ब्रिटिश शासन के लिए भारत के द्वार खुल गए। भारतीयों को एक सूत्र में बांधने वाली कोई प्रणाली नहीं रही। ऐसी कोई ताकत नहीं रही जो पश्चिम से आने वाली शक्तियों से लड़ सके। स्थानीय राजनीतिक और आर्थिक शक्तियां अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने लगी। कई रियासतें स्वतंत्र हो गई, जैसे कि बंगाल, अवध […]

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मुगल साम्राज्य का पतन

1.1) पृष्ठभूमि मुगल साम्राज्य की स्थापना जहीरूद्दीन बाबर द्वारा 1526 ई. में पानीपत के प्रथम विजय के पश्चात की गई थी तथा साम्राज्य का विस्तार उनके उततराधिकारियो के समय में भी जारी रहा । औरंगजेब (1657-1707) के शासन काल में मुगल साम्राज्य का क्षेत्रीय विस्तार अपने चरम पर पहुंच गया था। इसके साथ ही विघटन […]

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