भारतीय रिजर्व बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना वर्ष 1935 में (RBI Act, 1934) एक निजी बैंक के रूप में की गई थी। इसे सामान्य व्यवसाय बैंकिंग व्यवसाय के साथ अन्य दो कार्य – भारत में विद्यमान बैंकों का नियमन तथा नियंत्रण करना एवम सरकार के बैंक की भूमिका निभाना भी दिए गए थे। भारत सरकार द्वारा […]

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कोरोना और सेवा

आज की तारीख में जहां हमारे देश में कोरोना के कारण हालात बद से बत्तर स्थिति में है और देश एक बहुत ही बड़े संकट से जूझ रहा है एवम लाचार से देश के हालात है। वहीं हमारे देश की कुछ NGO और कुछ अन्य संगठन आगे आकर मानवता के हित की रक्षा कर रहे […]

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1965 से 1990 तक/ इंदिरा युग से उदारीकरण के पूर्व तक भारत की अर्थव्यवस्था

वर्ष 1966 में महंगाई दर 12% रही एवम खाद्य पदार्थ महंगाई दर 20% रही। दिसंबर 1954 में सामाजिक व आर्थिक नीति में समाजवादी स्वरूप देखने को मिला। 1969 में प्राइवेट बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। 1972 में बीमा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया गया। 1 मई 1973 में कोयला क्षेत्रों का राष्ट्रीयकरण किया गया। बीमार उद्योग […]

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कारण के आधार पर मुद्रास्फीति के प्रकार

कारण के आधार पर मुद्रास्फीति 3 प्रकार की होती है – मांग जनित मुद्रास्फीति लागत जनित मुद्रास्फीति संरचनात्मक मुद्रास्फीति 1} मांग जनित मुद्रास्फीति Drishti ias quick book :- https://amzn.to/2T0gNZ4 यह किसी भी अर्थव्रवस्था में मांग में बढ़ोत्तरी के कारण उत्पन्न होती है। यदि उपभोक्ता के पास आय में बढ़ोत्तरी के कारण अथवा बैंकों से कम […]

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Books for indian polity

सबसे पहले एनसीईआरटी 6th से 12th कर लेना सही रहेगा। इसके लिए आप दृष्टि आईएएस की एनसीईआरटी श्रृंखला की पुस्तक से पढ़ सकते है। Drishti IAS NCERT:- https://amzn.to/3eS662Z इसको पढ़ने के बाद आपका बेस पहले की तुलना में काफी मजबूत हो जायेगा। इसके बाद अब आप स्टैंडर्ड बुक्स पर आ सकते है। अब आपके पास […]

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मुद्रास्फीति

मुद्रास्फीति वस्तुओं एवम सेवाओं के मूल्य में निरंतर बढ़ोत्तरी की वह दशा है जिसके कारण एक देश की मुद्रा की क्रय क्षमता में कमी उत्पन्न होती है। यही कारण है कि जब किसी मुद्रा की क्रय क्षमता शून्य हो जाती है तब उसे परिचालन से बाहर कर दिया जाता है। वर्तमान में भारत में प्रयोग […]

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आर्थिक संवृद्धि एवम आर्थिक विकास

आर्थिक संवृद्धि एवम आर्थिक विकास एक दूसरे से संबंधित तो है परंतु एक दूसरे के समानार्थी नही है। संवृद्धि एक मात्रात्मक अवधारणा है जबकि विकास एक गुणात्मक अवधारणा है। आर्थिक संवृद्धि एक निश्चित समय में उत्पादन में बढ़ोत्तरी अथवा सकल घरेलू उत्पाद में बढ़ोत्तरी को संबोधित करती है। इससे भिन्न उत्पादन में बढ़ोत्तरी का लाभ […]

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Complete book list for prelims and mains of UPSC (CSE)

भूगोल डियर एस्पिरेंट्स, आज हम आपके लिए एक विशेष प्रोग्राम के तहत आपके लिए टॉपर्स से बात करके एक सम्पूर्ण बुक लिस्ट ले कर आए है जिसकी सहायता से आप distance learning program के तहत घर बैठ कर ही सम्पूर्ण तैयारी कर सकते है। तो आइए सबसे पहले बात करते गई भूगोल की। आप सभी […]

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सत्यनिष्ठा और भ्रष्टाचार : 3

सामाजिक स्तर से आगे बढ़कर यदि प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता स्तर पर भ्रष्टाचार की समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास किया जाए तो जहां एक तरफ प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता है वहीं दूसरी तरफ जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी पड़ेगी। इस हेतु संस्थागत स्तर पर निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते है – सत्यनिष्ठा व्यक्तित्व […]

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सत्यनिष्ठा और भ्रष्टाचार : 2

वर्तमान समय में आधुनिकता का संदर्भ नकारात्मक होता जा रहा है। सामाजिक पहचान आर्थिक संवृद्धि और संप्रभुता हो गई है। समाज में लोग आने वाली भावी पीढ़ियों को तकनीक और व्यवसायिक सक्षमता प्रदान करना चाहते है। परंतु चारित्रिक मूल्यों में ह्रास के कारण थोड़ी सी विपरीत परिस्थिति में भावी पीढ़ी अपनी आकांक्षाओं को पूर्ण करने […]

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