भागीदारी आधारित शासन

भागीदारी आधारित शासन के इस दौर में सरकार निजी क्षेत्र और नागरिक समाज तीनों एक साथ मिलकर कार्य कर रहे है। आज सेवाओं का संपादन लोक-निजी-नागरिक भागीदारी के आधार पर हो रहा है। शासन में EEE बनाए रखने के लिए सिविल सेवकों से यह अपेक्षा की जाती है कि अपने स्वविवेक के आधार पर निर्णय […]

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सत्यनिष्ठा और सिविल सेवकों के स्वविवेक के निर्णय में संबंध

CSCC 1964 के अनुसार एक लोकसेवक/ सिविलसेवक को हमेशा व्यक्तित्व के स्तर पर सत्यनिष्ठा के मूल्य को धारण करना चाहिए। आचरण संहिता का मानना है कि एक सिविल सेवक को जो की संस्था के उच्च स्तर पर कार्य कर रहा होता है। स्वविवेक के आधार पर निर्णय लेते समय व्यक्ति अपने अंतः प्रज्ञा (Intution) के […]

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सहिष्णुता और UNESCO

सामान्यतः बोलचाल की भाषा में सहिष्णुता शब्द का प्रयोग धार्मिक मतांतर और विरोधाभास की स्थिति में सामंजस्य स्थापित करने के लिए किया जाता रहा है। परंतु सहिष्णुता इसमें भी कुछ अधिक है। UNESCO के अनुसार (सहिष्णुता के सिद्धांत पर घोषणापत्र 1995) सहिष्णुता वैश्विक परिप्रेक्ष्य में निम्न रूप से परिभाषित की जा सकती है – सहिष्णुता […]

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समानुभूति शून्यता क्या है ? ( According to world Bank) : Epathy Deficit

समानुभूति व्यक्तित्व का वह आयाम है जहाँ व्यक्ति सर्वप्रथम अपनी भावनाओं के प्रति जागृत होता है तत्पश्चात इस भावनात्मक जागरूकता के आधार पर दूसरे की पीड़ा को महसूस करने का प्रयास करता है।विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान वैश्विक समाज में समानुभूतिक शून्यता की स्थिति व्याप्त है। कहने का तात्पर्य यह है कि इस […]

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समानुभति और कार्य संस्कृति

इस प्रकार यदि संस्थागत स्तर पर नेतृत्वकर्ता में यदि समानुभूति का गुण है तो वह अपने संस्था के स्तर पर एक अच्छी कार्यसंस्कृति का निर्माण करेगा क्यूंकि प्रायः उच्च स्तर पर निर्णय लेने के दौरान मतभेद और विरोधाभास की स्थिति पाई जाती है। इस दौरान यदि नेतृत्वकर्ता समानुभूति की अवस्था पर रहता है तो वह […]

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भारत परिषद अधिनियम 1892

1857 में हुई राज्य क्रांति तथा शिक्षा के प्रसार ने भारतीयों में राष्ट्रीयता की भावना को सुदृढ़ किया। 1885 में कांग्रेस की स्थापना तथा इलवर्ट बिल विवाद के पश्चात भारतीयों को प्रशासन तथा विधि निर्माण में और अधिक प्रतिनिधित्व देने के मांग ने काफी जोर पकड़ लिया, जिसके फलस्वरूप यह अधिनियम पारित किया गया। प्रावधान […]

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भारत परिषद अधिनियम 1861 (The Indian council Act, 1861)

1861 का यह कानून भारत के संवैधानिक विकास में एक महत्वपूर्ण कदम था। इस कानून से अंग्रेजों की वह नीति आरंभ हुई जिसे सहयोग की नीति ( Policy of Association) या उदार निरंकुशता (Benevolent Despotism) का नाम दिया गया क्योंकि इसके द्वारा सर्वप्रथम भारतीयों को शासन में सम्मिलित करने का प्रयत्न किया गया था। 1858 […]

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अध्ययन की प्रासंगिकता :

एक सिविल सेवक को संस्थागत स्तर पर अपने कर्मियों का नेतृत्व करना होता है, उनमें टीम भावना जागृत करनी होती है तभी वह अपने लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर हो पाएगा। इस रूप में इनकी भूमिका संस्था स्तर पर नेता के रूप में होती है। अतः महान नेताओं के जीवन और उपदेशों को पढ़कर एक […]

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माननीय मूल्य – महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा(Human Values- lessons from the lives and teachings of great leaders, reformers and administrators)

महान नेता/ नेतृत्व क्या है? जो लोगो की भावनाओं को समझता हो। जो संगठन के लिए लक्ष्य निर्धारित करता हो। जो अपने अनुयायियों को सदैव अभिप्रेरित करता हो। जो किसी के ऊपर नहीं किसी के साथ चलने की बात करता हो। जो सदैव नवाचार का प्रयोजन करता हो। जो विषम परिस्थिति में भी सबसे आगे […]

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व्यक्तिगत स्तर पर समानुभति कैसे विकसित की जाये :

स्वजागरूकता के सभी आयामों को अपनाना है। व्यक्तिगत स्तर पर किसी अनुकरणीय Role Model को अपनाएं। हमेशा धैर्यपूर्वक संवाद स्थापित करे। संवाद के दौरान हमेशा सामने वाले व्यक्ति की बातों व भावनाओं के प्रति रोचकता का भाव रखें। सदैव सामने वाले व्यक्ति में जिज्ञासा पैदा करें। संवाद के दौरान किसी प्रकार का पूर्वाग्रह न रखें। […]

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